अमेरिका में 70 वर्षीय भारतीय महिला के साथ बर्बरताः हथकड़ी पहनाया-घंटों जमीन पर बिठाकर रखा

Published : Sep 26, 2025, 07:18 AM IST
Harjit Kaur deported to India

सार

Harjit Kaur Deported To India: अमेरिका में 30 साल से रह रही 73 वर्षीय सिख महिला बीबी हरजीत कौर को इमिग्रेशन अधिकारियों ने हथकड़ी पहनाकर भारत भेज दिया। इस दौरान उन्हें न तो परिवार से मिलने दिया गया और न ही ठीक से दवाइयां व खाना मिला।

Harjit Kaur Deported To India: 73 वर्षीय सिख महिला बीबी हरजीत कौर की बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। ICE ने उन्हें हथकड़ी पहनाकर कैलिफ़ोर्निया से जॉर्जिया ले जाया और फिर चार्टर फ्लाइट से पंजाब भेज दिया। इस दौरान ना उन्हें परिवार से मिलने का मौका मिला ना ही उनके वकील से। 48 घंटों में उन्हें बिना बिस्तर के रखा। जब उन्होंने के लिए खाना मांगा तो सिर्फ बर्फ की ट्रे और एक सैंडविच दिया गया। यहां तक कि उनके डेंचर भी नहीं दिए गए। हरजीत कौर अमेरिका में 30 साल से रह रही थीं, लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में उन्हें हिरासत में लेकर भारत भेज दिया गया। उन्हें अपने परिवार से अलविदा कहने का भी मौका नहीं मिला।

30 साल से अमेरिका में रह रही थीं हरजीत कौर

हरजीत कौर के वकील दीपक अहलूवालिया ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए इस बात की जानकारी दी। कैलिफोर्निया में आव्रजन अधिकारियों ने जांच के बाद कौर को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनके परिवार और समुदाय में गुस्सा फैल गया। हरजीत कौर अमेरिका में पिछले 30 साल से रह रही थीं। अहलूवालिया ने बताया कि कौर को बेकर्सफील्ड के हिरासत केंद्र में रखा गया और फिर लॉस एंजिलिस ले जाया गया। वहां से उन्हें जॉर्जिया और उसके बाद नई दिल्ली के लिए विमान में बिठाया गया। उनके परिवार ने अधिकारी से कहा कि उन्हें रिश्तेदारों से मिलने का मौका दिया जाए, लेकिन अनुमति नहीं मिली।

60-70 घंटों तक नहीं मिला बिस्तर

वकील ने कहा कि हरजीत कौर को लगभग 60-70 घंटों तक बिस्तर नहीं मिला और उन्हें जमीन पर कंबल ओढ़कर सोने के लिए मजबूर किया गया। उनके दोनों घुटनों की सर्जरी हो चुकी थी, इसलिए उठना भी मुश्किल था। उन्हें नहाने की अनुमति नहीं दी गई। जॉर्जिया से आर्मेनिया होते हुए आईसीई चार्टर्ड विमान से वह दिल्ली आईं। एबीसी7 न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हरजीत कौर बिना सही दस्तावेजों के अमेरिका में रह रही थीं। वह 1992 में अपने दो बेटों के साथ अमेरिका आई थीं। 2012 में उनका शरण आवेदन खारिज कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी वह पिछले 13 साल से हर छह महीने में सैन फ्रांसिस्को स्थित आईसीई के पास जाकर रिपोर्ट करती रहीं।

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