AAP ने कश्मीरियों की दु:खती रगों पर रखा हाथ, BJP भी घेरा, जम्मू-कश्मीर को लेकर कर दी यह मांग

Published : Nov 13, 2022, 06:48 PM ISTUpdated : Nov 13, 2022, 06:56 PM IST
AAP ने कश्मीरियों की दु:खती रगों पर रखा हाथ, BJP भी घेरा, जम्मू-कश्मीर को लेकर कर दी यह मांग

सार

5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने धारा 370 को निरस्त कर दिया था। धारा 370 के खत्म होने के बाद केंद्र ने संसद में बिल लाकर इसे जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।

Jammu Kashmir statehood: आम आदमी पार्टी ने भी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की वकालत की है। आप ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए और राज्य में एक निर्वाचित सरकार की जल्द से जल्द स्थापना के लिए निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए। रविवार को जम्मू-कश्मीर के कई नेता, जनप्रतिनिधियों ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली है। आप राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष हर्षदेव सिंह ने इन लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई है।

जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द हो चुनाव

आप नेता हर्षदेव सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराया जाना चाहिए। यहां जनता की निर्वाचित सरकार होनी चाहिए लेकिन लगातार चुनावों में देरी की जा रही है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर में एक निर्वाचित सरकार की स्थापना की मांग करते हैं। सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किए जाने का आश्वासन दिया था लेकिन वह लगातार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। आप नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अब राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना चाहिए। यह भी देश का अभिन्न हिस्सा है, यहां के लोगों को भी लोकतंत्र में जीवनयापन का अधिकार है। यहां के लोगों को भी विकास चाहिए।

2019 में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बना 

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था। यहां 370 के प्रावधान लागू थे। लेकिन 5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने धारा 370 को निरस्त कर दिया था। धारा 370 के खत्म होने के बाद जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन राज्य का विशेष दर्जा भी खत्म हो गया। केंद्र ने संसद में बिल लाकर इसे जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। इसके बाद देश में दो नए केंद्र शासित प्रदेश 31 अक्टूबर 2019 को अस्तित्व में आया था।

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