AAP ने सुप्रीम कोर्ट में दी वक्फ संशोधन बिल को चुनौती, ओवैसी बोले-मुसलमानों के खिलाफ यह एक युद्ध

Published : Apr 05, 2025, 03:37 PM ISTUpdated : Apr 05, 2025, 04:37 PM IST
Supreme Court of India (File Photo/ANI)

सार

Waqf Amendment Bill: सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस और AIMIM के बाद AAP भी पहुंची। मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता, वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सवाल। जानिए पूरा विवाद और राजनीतिक घमासान। 

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill 2025) अब राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की दहलीज पर पहुंच चुका है। कांग्रेस (Congress) और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) भी इस विवादित कानून के खिलाफ मैदान में उतर आई है। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) ने इस कानून को धार्मिक स्वायत्तता और अल्पसंख्यक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं।

क्या है वक्फ संशोधन बिल?

1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन कर लाया गया यह बिल वक्फ संपत्तियों (Waqf Properties) के प्रबंधन को लेकर नया स्ट्रक्चर बनाया गया है। इस बिल में वक्फ को कोर्ट के समक्ष भी जवाबदेह बनाया गया है। भारत में वक्फ संपत्तियां (Waqf Properties in India) धार्मिक, व्यावसायिक और कृषि भूमि का एक बड़ा नेटवर्क हैं। वक्फ असेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के अनुसार, देश में कुल 8,72,324 Waqf संपत्तियां दर्ज हैं। यह देश की धार्मिक और सामुदायिक स्वामित्व वाली सबसे बड़ी संपत्ति कैटेगरी में एक है। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता आएगी और मुस्लिम महिलाओं को फायदा होगा। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक आज़ादी को कमजोर करता है।

AAP की याचिका में क्या कहा गया?

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि यह कानून मनमाने सरकारी हस्तक्षेप (arbitrary executive interference) का रास्ता खोलता है और यह संविधान द्वारा दिए गए अल्पसंख्यकों के धार्मिक संस्थानों को चलाने के अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 25-28 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 30 (अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकार) के उल्लंघन का हवाला दिया गया है।

ओवैसी और कांग्रेस का क्या कहना है?

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस बिल के जरिए मुसलमानों पर युद्ध छेड़ा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिंदू एंडोमेंट बोर्ड (Hindu Endowment Board) या जैन एंडोमेंट बोर्ड (Jain Endowment Board) में गैर-संबंधित सदस्य नहीं होते, तो वक्फ बोर्ड (Waqf Board) में क्यों? वहीं कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने इसे धार्मिक भेदभाव बताते हुए कहा कि यह कानून मुस्लिम संस्थाओं पर विशेष नियंत्रण थोपता है।

सरकार का बचाव और BJP का पक्ष

BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि यह बिल वक्फ बोर्ड में जवाबदेही लाएगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ना कोई मस्जिद छुई जाएगी, ना कोई कब्रिस्तान। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं को इस कानून से ज्यादा अधिकार मिलेंगे।

बिल पास होने के बाद देशभर में विरोध

लोकसभा (Lok Sabha) में यह बिल गुरुवार को 288 वोट से पास हुआ, जबकि 232 सांसदों ने विरोध किया। राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी कड़े विरोध के बावजूद 128 समर्थन और 95 विरोधी वोटों से यह पारित हो गया। इसके बाद शुक्रवार की नमाज़ के बाद कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

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