
Adani-Hindenburg Row. अदानी-हिंडनबर्ग विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को जांच के लिए तीन महीने का और समय दिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। सेबी इस मामले से जुड़े दो केस की जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अडानी ग्रुप के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर आया है। हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में अडानी पर शेयरों के मूल्य को लेकर कई आरोप लगे थे। जिससे अडानी की कंपनियों के मूल्यांकन में भारी गिरावट आई।
अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सेबी को 2 मामलों की जांच के लिए 3 महीने का और समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच को सेबी से एसआईटी को ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने केंद्र और सेबी को यह देखने का निर्देश दिया कि क्या शॉर्ट सेलिंग पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट द्वारा कानून का कोई उल्लंघन हुआ है। यदि हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। यह फैसला अदानी समूह की कंपनियों के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर आयाा है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने पिछले नवंबर में फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अडानी पर क्या लगे हैं आरोप
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अडानी ने कृत्रिम रूप से अपने शेयरों की कीमतें बढ़ा दीं। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के एक हिस्से में कहा गया है कि इससे अडानी की कंपनियों के शेयर मूल्य में भारी गिरावट आई, जिसका अनुमान लगभग 100 बिलियन डॉलर है। इस मामले को लेकर राजनीति भी काफी गर्म रही। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मामले की जांच की डिमांड की गई। एक याचिक यह भी है कि सेबी ने अडानी की कंपनियों को बचाने का काम किया। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया। साथ ही रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमिटी भी गठित की गई। इस कमेटी ने पाया कि सेबी की तरफ से कोई चूक नहीं की गई है।
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