
नई दिल्ली. सेना ने 132 साल की सेवा के बाद बुधवार को सैन्य फार्म को बंद करने फैसला किया है। सैन्य फार्मों से हर साल 3.5 करोड़ लीटर तक दूध का उत्पादन होता था। सेना ने कहा कि 132 साल की शानदार सेवा के बाद सैन्य फार्म को बंद करने का फैसला किया गया। 1889 में ब्रिटिश काल के दौरान पूरे भारत में विभिन्न चौकियों पर तैनात जवानों को स्वच्छ, पौष्टिक व ताजा गाय के दूध की आपूर्ति के लिए ये फार्म शुरू किए गए थे।
देश में 20 हजार एकड़ भूमि पर सैन्य फार्म फैले हैं। ये अंबाला, कोलकाता, श्रीनगर, आगरा, पठानकोट, लखनऊ, मेरठ, गुवाहाटी और प्रयागराज में प्रमुख सैन्य ठिकानों पर स्थित हैं।
इलाहाबाद में बना था पहला फर्म
लेफ्टिनेंट जनरल शशांक मिश्रा ने बुधवार को बताया, पहला फार्म 1 फरवरी, 1889 को इलाहाबाद में स्थापित किया गया था और 1947 में आजादी तक देश में ऐसे 130 फार्म थे। 1990 के दशक में लेह और करगिल में भी सैन्य फार्म बनाए गए, ताकि यहां तैनात सैनिकों को ताजा दूध मिल सके।
राज्यों को सौंपी जाएंगी गायें
लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने कहा, डेयरी फार्मिंग में सैन्य फार्म का बड़ा योगदान रहा है, जिससे सेना को देश के दुर्गम इलाकों में दूध उपलब्ध कराने में मदद मिली। इसके लिए सैन्य फार्मों के सदस्यों को मैं आर्मी चीफ की ओर से बधाई देता हूं। यह हम सभी के लिए बड़ा भावुक दिन है।
उन्होंने बताया कि फार्म बंद होने के बाद यहां मौजूद गायों को राज्यों को सौंपने की पेशकश की गई है। वहीं, इस विभाग में काम करने वाले लोगों को अन्य विभागों में शिफ्ट किया जाएगा। फार्म की भूमि का इस्तेमाल सेना के विस्तार में किया जाएगा।
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