
नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देश के किसानों को चिट्ठी लिखी है। 8 पन्नों की चिट्ठी में नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को 8 आश्वासन दिए हैं कि आप विश्वास रखिए, किसानों के हितों में किये गए ये सुधार भारतीय कृषि में नए अध्याय की नींव बनेंगे। देश के किसानों को और स्वतंत्र करेंगे, सशक्त करेंगे।
नरेंद्र सिंह तोमर के 8 पन्नों के पत्र की महत्वपूर्ण बातें
1- दिल्ली के आसपास झूठ की दीवार बनाने की साजिश हो रही है, उसकी सच्चाई आपके सामने रखूंगा
नरेंद्र सिंह तोमर ने लिखा, देश का कृषि मंत्री होने के नाते, मेरा कर्तव्य है कि हर किसान का भ्रम दूर करूं। हर किसान की चिंता दूर करूं। मेरा दायित्व है कि सरकार और किसानों के बीच दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में जो झूठ की दीवार बनाने की साजिश रची जा रही है उसकी सच्चाई और वस्तुस्थिति आपके सामने रखूं।
2- मैं किसान परिवार से हूं, फसल कटने के बाद उसे बेचने के लिए हफ्तों का इतंजार मैंने भी देखा है
उन्होंने लिखा, मैं किसान परिवार से आता हूं। खेती की बारीकियां और खेती की चुनौतियां, दोनों को ही देखते हुए समझते हुए मैं बड़ा हुआ हूं। खेत में पानी देने के लिए देर रात जागना, पानी चलते हुए मेड़ टूट जाने पर उसे बंद करने के लिए भागना, असमय बारिश का डर, समय पर बारिश की खुशी- ये सब मेरे भी जीवन का हिस्सा रहे हैं। फसल कटने के बाद उसे बेचने के लिए हफ्तों का इंतजार भी मैंने देखा है।
3- नए कानून लागू होने के बाद इस बार एमएसपी पर सरकारी खरीद के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए
कृषि मंत्री के तौर पर मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि नए कानून लागू होने के बाद इस बार एमएसपी पर सरकारी खरीद के भी पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। ऐसे समय में जब हमारी सरकार एमएसपी पर खरीद के नए रिकॉर्ड बना रही है, खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ रही है कुछ लोग किसानों से झूठ बोल रहे हैं कि एमएसपी बंद कर दी जाएगी। इस सफेद झूठ को पहचाने और इसे सिरे से खारिज करें।
4- आप पंजाब चुनाव में किसानों को मंडी के बाहर उपज बेचने की सुविधा दे रही थी वो विरोध क्यों कर रही?
जो आम आदमी पार्टी पंजाब चुनाव के समय अपने घोषणापत्र में लिख रही थी कि किसानों को मंडी के बाहर भी उपज बेचने की सुविधा देगी, वह अब उल्टा क्यों बोलने लगी है? हुड्डा कमेटी ने कृषि सुधारों की बात कही थी, उस कमेटी में अकाली दल के बड़े नेता भी थे तो फिर आज अलग सुर में क्यों बोल रहे हैं?
5- सीमा की तरफ जवानों के लिए रसद ले जान रही ट्रेनें रोकने वाले ये किसान हो ही नहीं सकते : नरेंद्र सिंह तोमर
जब लेह लद्दाख में सीमा पर सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ी हुई हों, जब कई फीट बर्फ गिरी हुई हो, तो सीमा की तरफ जवानों के लिए रसद ले जान रही ट्रेनें रोकने वाले ये किसान हो ही नहीं सकते। इन लोगों की वजह से हमें अपने सैनिकों तक रसद और अन्य जरूरी सामान हवाई मार्ग एवं अन्य साधनों से पहुंचाना पड़ रहा है। जनता की गाढ़ी कमाई इन वैकल्पिक इंतजामों में लग रही है।
6- आपके हाथ जोड़कर विनती करता हूं किसी बहकावे में आए बिना कृपया तथ्यों के आधार पर चिंतन मनन करें
पर्द के पीछे छिपकर किसानों को गुमराह करने वाले इन लोगों की विचारधारा सन 62 की लड़ाई में भी देश के साथ नहीं थी। आज ये लोग फिर सन 62 की ही भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने लिखा, मैं इस पत्र के माध्यम से आपके हाथ जोड़कर यह विनती करता हू कि ऐसे किसी भी बहकावे में आए बिना कृपया तथ्यों के आधार पर चिंतन मनन करें।
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