
नई दिल्ली. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने विशेष विधानसभा सत्र के दौरान विवादास्पद कृषि बिलों की कॉपी को फाड़ दिया। यह सब किसानों के विरोध पर चर्चा के दौरान हुआ। जोरदार शब्दों में अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से पूछा कि कोविद महामारी के दौरान कृषि कानूनों को पारित करने की क्या जल्दी थी?
'केंद्र से अपील करता हूं कि अंग्रेजों से बदतर ना बनें'
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्यसभा में वोटिंग के बिना ही तीन कानून पास कर दिए गए। मैं इन कानूनों की कॉपी फाड़ता हूं और केंद्र से अपील करता हूं कि अंग्रेजों से बदतर ना बनें।
दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल ने कहा, केंद्र सरकार कह रही है कि किसानों को कृषि कानूनों का फायदा समझ नहीं आ रहा इसलिए अपने दिग्गज नेताओं को उतारा है। योगी आदित्यनाथ एक रैली में कह रहे थे कि इन कानूनों से किसी की जमीन नहीं जाएगी, ये फायदा है क्या? उन्होंने कहा, भाजपा वाले कहते हैं कि किसान अब अपनी फसल पूरे देश में कहीं भी बेच सकता है। धान का एमएसपी 1868 रुपए है, ये बिहार और उत्तर प्रदेश में 900-1000 रुपए में बिक रहा है। मुझे बता दीजिए कि ये किसान देश में कहां अपनी फसल बेचकर आएं।
केजरीवाल ने आज कॉपी फाड़ी, लेकिन वे कृषि कानूनों को पहले ही कर चुके हैं लागू
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने किसानों के समर्थन में एक दिन का उपवास भी किया था। लेकिन खास बात ये है कि जिन बिलों का किसान विरोध कर रहे हैं, केजरीवाल सरकार उन्हें पहले ही लागू कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब केजरीवाल सरकार किसानों की हितैषी है तो ये बिल लागू क्यों किए?
आप के विधायकों ने भी फाड़ी थी कृषि बिलों की कॉपी
आम आदमी पार्टी के विधायक महेंद्र गोयल, सोमनाथ भारती ने सदन में कृषि कानून की कॉपी को फाड़ दिया। उन्होंने इस दौरान जय जवान, जय किसान के नारे भी लगाए। महेंद्र गोयल ने कहा, हम इन काले कानूनों को मानने से इनकार करते हैं, जो किसानों के खिलाफ हैं। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा, हम तीनों कानूनों का विरोध करते हैं और अरविंद केजरीवाल सरकार किसानों के साथ खड़ी है।
पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सिंघु बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा सीमा पर) पर किसानों से मुलाकात की और कहा था, हम किसानों की सभी मांगों का समर्थन करते हैं। उनके मुद्दे और मांगें मान्य हैं। केजरीवाल ने विधेयकों को देश के लिए हानिकारक भी कहा था।
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