जुड़वा भाइयों के जन्म के वक्त से ही जुड़े थे सिर, इनके नाम अब दर्ज हुआ ये बड़ा रिकॉर्ड

Published : Nov 13, 2019, 12:03 PM ISTUpdated : Nov 13, 2019, 12:09 PM IST
जुड़वा भाइयों के जन्म के वक्त से ही जुड़े थे सिर, इनके नाम अब दर्ज हुआ ये बड़ा रिकॉर्ड

सार

जग्गा और कालिया (उम्र ढाई साल) के दिमाग आपस में जुड़े हुए थे। ऑपरेशन हमारी 40 डॉक्टरों की टीम ने किया था। ये ऑपरेशन 16 घंटे तक चला। ये पहली बार था जब एम्स में इस तरह का ऑपरेशन किया गया।

नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में पहली बार दो जुड़वा बच्चों के दिमाग को अलग करने की सफल सर्जरी हुई थी। साल 2017 में यह एक सफल ऑपरेशन रहा था। अब इस सर्जरी को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। सफल क्रानियोपैगस सर्जरी में जुड़वा भाई जग्गा और कालिया को अलग किया गया था। देश के पहले ऐसे ऑपरेशन के रूप में इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के 2020 के संस्करण में दर्ज  किया गया है। 

एक ई-मेल में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के संपादकीय कार्यकारी ट्रसे बेंजामिन ने कहा, "बधाई! हम आपको सूचित करते हुए खुश हैं कि आपका रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के 2020 संस्करण में दर्ज किया गया है।" उस समय एम्स में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख श्री महापात्रा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा-  "यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती थी। यह भारत में पहली सफल क्रेनियोपैगस सर्जरी भी थी।" 

40 डॉक्टरों की टीम ने किया था ऑपरेशन

आपको बता दें कि जग्गा और कालिया (उम्र ढाई साल) के दिमाग आपस में जुड़े हुए थे। ऑपरेशन हमारी 40 डॉक्टरों की टीम ने किया था। ये ऑपरेशन 16 घंटे तक चला। ये पहली बार था जब एम्स में इस तरह का ऑपरेशन किया गया।दोनों बच्चों दोनो के सिर में एक ही नस थी, पहले उनके सर में दूसरी नस लगाई गई। ब्लड की कमी थी उसे दूर किया गया। अब ऐसे केस में 90 फीसदी चांस कम होता है बचने का। मगर पूरी कोशिश की गई कि बच्चे स्वस्थ हों। सर्जरी के बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया था। 

16 घंटे लगातार चला था ऑपरेशन

एम्स में डॉक्टरों की टीम ने 16 घंटे तक ऑपरेशन कर दोनों के दिमाग को अलग किया था। इस ऑपरेशन में 20 सर्जन डॉक्टर थे, पूरी टीम 40 डॉक्टरों की थी। इस ऑपरेशन को प्रोफेसर एके महापत्रा ने लीड किया था। डॉक्टर का कहना था कि 25 लाख बच्चों में 1 केस इस तरह का होता है। ये बहुत चैलेंजिंग था मगर हमारी पूरी टीम ने इस काम को सही ढंग से किया गया था। अब एम्स में हुए इस अॉपरेशन को लुम्का बुक रिकॉर्ड में जगह मिल गई है। 

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