
नई दिल्ली: एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने बताया कि एयर इंडिया अपने बड़े विमानों (वाइड-बॉडी) की मरम्मत के लिए तुर्की की कंपनी, टर्किश टेक्निक, पर कम निर्भर रहने की योजना बना रही है। मरम्मत और देखभाल (MRO) सेवाओं के लिए वो अब दूसरे विकल्प ढूंढ रही है। ये फैसला पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और तुर्की के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर लिया गया है।
तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था और भारत के आतंकवाद विरोधी अभियानों की निंदा की थी। इसके जवाब में, भारत के नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने 15 मई को तुर्की की कंपनी, सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, का सुरक्षा लाइसेंस रद्द कर दिया। फिर, 30 मई को, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो को तुर्की एयरलाइंस से लीज पर लिए गए दो बोइंग 777 विमानों को चलाने के लिए तीन महीने की और मोहलत दी। साथ ही, 31 अगस्त तक लीज खत्म करने का निर्देश भी दिया।
एयर इंडिया अपने बड़े विमानों की मरम्मत के लिए टर्किश टेक्निक पर निर्भर थी। लेकिन, अब वो दूसरे रास्ते तलाश रही है। एयर इंडिया ने बताया कि वो अपने विमानों को मरम्मत के लिए अभी मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और अमेरिका भेजेंगे। जब तक भारत में पूरी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक ऐसा ही चलता रहेगा। एयर इंडिया ने यह भी साफ किया कि जब तक दूसरी जगह पूरी तरह व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वो थोड़े बहुत काम के लिए टर्किश टेक्निक का इस्तेमाल करते रहेंगे।
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