Maharashtra BJP. एनसीपी नेता अजीत पवार ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली है और दावा किया है कि उनके पास एनसीपी के 53 में से 40 विधायकों का समर्थन है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का सिंबल, समर्थन सब कुछ उनके पास है। ऐसा ही कुछ करीब 1 साल पहले शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने किया था और शिवसेना को तोड़कर महाराष्ट्र के सीएम बने थे। राजनैतिक विशेषज्ञों की मानें तो यह महाराष्ट्र में 2 साल से भीतर बीजेपी की दूसरी बड़ी स्ट्राइक है, जिसने राज्य में विपक्ष को पूरी तरह से नेस्तनाबूत कर दिया है।
बीजेपी की सियासी चाल में ढेर हुआ विपक्ष
राजनीति में कभी शरद पवार को सबसे बड़ा चाणक्य समझा जाता था लेकिन अब बीजेपी ने उन्हीं की पार्टी को तोड़कर यह साबित कर दिया है कि उनका समय खत्म हो गया है। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार एनसीपी के ज्यादातर विधायकों का समर्थन लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बन गए हैं। यही वजह है कि शरद पवार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। अजीत पवार ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि वे एनसीपी को खत्म कर देंगे। राजनैतिक चश्मे से देखा जाए तो पिछले 2 साल में बीजेपी का यह दूसरा बड़ा हमला है, जब उन्होंने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन के एक-एक धागे खोल डाले। पहली बार एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों के साथ एमवीए को झटका दिया और अब अजीत पवार भी 40 विधायकों के साथ बीजेपी के पाले में जा चुके हैं।
एनसीपी को ले डूबा शरद पवार का मोह
शरद पवार ने भतीजे अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल को सुप्रिया सुले के साथ हाल ही में राकांपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। पार्टी में छगन भुजबल, दिलीप वाल्से पाटिल, हसन मुश्रीफ, रामराजे निंबालकर, धनंजय मुंडे, अदिति तटकरे, संजय बंसोडे, धर्मराव बाबा अत्राम जैसे अन्य दिग्गज शामिल हैं। बीजेपी नेता फड़णवीस ने दो दिन पहले कहा था कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द ही होगा। वहीं एकनाथ शिंदे ने हाल ही में दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मुलाकात भी की थी। अजीप पवार के शपथ के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारे पास एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हैं। डबल इंजन सरकार अब ट्रिपल इंजन बन गई है। महाराष्ट्र के विकास के लिए मैं अजीत पवार और उनके नेताओं का स्वागत करता हूं। अजीत पवार का अनुभव मदद करेगा।
एनसीपी को पास क्या बचा है रास्ता
अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी के अभी भी संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत सभी बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए विचार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के हालिया फैसले के मुताबिक मूल पार्टी को विलय करना होगा (सिंबल के आदेश के पैरा 16 के तहत) अजित पवार को सिंबल के आदेश के तहत भारत के चुनाव आयोग का रुख करना होगा और साबित करना होगा कि वह असली एनसीपी हैं। तब तक उन्हें और उनके समर्थक विधायकों को अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा।
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