
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के तहत एक तरफ बेंगलुरु में निर्मित ‘स्काई स्ट्राइकर’ आत्मघाती ड्रोन पाकिस्तान पर हमला कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान से आ रही मिसाइलों को रोकने में स्वदेशी आकाश वायु रक्षा प्रणाली अहम भूमिका निभा रही है। इसे बेंगलुरु के एक वैज्ञानिक ने विकसित किया है, जो गर्व की बात है।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. प्रह्लाद राम राव (78) ने भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में वैज्ञानिक के रूप में सेवा करते हुए आकाश परियोजना के सबसे कम उम्र के परियोजना निदेशक के रूप में काम किया था। उन्हें यह ज़िम्मेदारी भारत के मिसाइल मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सौंपी थी। हैदराबाद स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड में निर्मित आकाश प्रणाली को 15 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद विकसित किया गया है।
आज इसे देश की रक्षा करते देख डॉ. राम राव भावुक होकर कहते हैं, ‘मेरे बच्चे (आकाश मिसाइल) को दुश्मन के हवाई हमलों को सटीकता से मार गिराते देखना मेरे जीवन का सबसे खुशी का दिन है। यह उम्मीद से भी बेहतर काम कर रहा है।’ उन्होंने यह भी बताया कि ड्रोन, मिसाइल, हेलीकॉप्टर ही नहीं, बल्कि अमेरिका के F-16 लड़ाकू विमानों को भी रोकने में सक्षम आकाश प्रणाली को देश की रक्षा के लिए इस्तेमाल करने में सेना हिचकिचा रही थी।
कौन हैं डॉ. प्रह्लाद?: 1947 में बेंगलुरु (तत्कालीन मद्रास प्रांत) में जन्मे प्रह्लाद ने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से एयरोनॉटिकल और एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। 1971 में DRDO में वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले राम राव 1997 में इसके निदेशक बने। उन्होंने पुणे के DIAT और बेंगलुरु के स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के कुलपति के रूप में भी काम किया है।
आकाश की ज़िम्मेदारी राव की थी
हैदराबाद के DRDO केंद्र में कार्यरत थे डॉ. प्रह्लाद राव
डॉ. अब्दुल कलाम ने राव को सौंपी थी आकाश की ज़िम्मेदारी
15 साल की कड़ी मेहनत से विकसित हुई आकाश एयर डिफेंस सिस्टम
देश की रक्षा में सिस्टम की क्षमता देखकर राव गदगद
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