
नई दिल्ली. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश को लेकर कहा कि इस्लाम इसकी इजाजत देता है और महिलाएं मस्जिद में आ सकती हैं। AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिर करके कहा कि "मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति है। मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की इस्लाम इजाजत देता है।
हालांकि, महिलाओं के लिए ग्रुप प्रेयर में शामिल होना अनिवार्य नहीं है।" बोर्ड ने दो मुस्लिम महिलाओं द्वारा दायर याचिका के जवाब में ये हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया। बोर्ड ने अपने जवाब में साफ तौर पर कहा कि मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश के लिए इस्लाम अनुमति देता है। वह मस्जिद में जा सकती हैं। लेकिन, बोर्ड ने साथ में यह भी कहा कि मस्जिद में जाने वाली महिलाओं के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह वहां ग्रुप प्रेयर में भी शामिल हों।
यास्मीन और जुबैर ने दाखिल की है याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया था।10 से 50 साल तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को कोर्ट ने लैंगिक भेदभाव करार दिया था। इसी आधार पर यास्मीन और जुबैर ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर महिलाओं को मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ने की इजाजत की मांग की थी। याचिका के अनुसार, अभी भारत में जमात-ए-इस्लामी संगठन के तहत आने वाली मस्जिदों में महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं, लेकिन सुन्नी समेत अन्य पंथों की मस्जिदों में पाबंदी है।
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