
नई दिल्ली [भारत], 12 जुलाई (एएनआई): सरकार ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले, 19 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार द्वारा अपने विधायी एजेंडे की रूपरेखा पेश करने और विपक्षी दलों द्वारा उन मुद्दों को सामने रखने की संभावना है, जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाने का इरादा रखते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि हर संसद सत्र से पहले आयोजित होने वाली यह सर्वदलीय बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। सरकार के पास एक बड़ा विधायी एजेंडा है और सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
इस सत्र के हंगामेदार रहने की उम्मीद है, क्योंकि हाल के हफ्तों में कुछ विपक्षी दलों में दरारें और 'विभाजन' देखा गया है। विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल मची हुई है, जिसके 20 सांसदों ने 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय कर लिया है। उन्होंने लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है। पार्टी के तीन सांसदों ने अपनी राज्यसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया है और भाजपा में शामिल हो गए हैं। शिव सेना (यूबीटी) में और 'विभाजन' हुआ है, जिसमें लोकसभा में पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में शामिल हो गए हैं। राज्यसभा में सात आप सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
विपक्ष द्वारा NEET-UG पेपर लीक मामले और ऑपरेशन सिंदूर में हताहतों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी को उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले कहा था कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। रिजिजू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "भारत सरकार की सिफारिश पर, माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। सत्र 20 जुलाई, 2026 को शुरू होगा और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णयों के लिए 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा।"
प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से भी 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अपनाने की उम्मीद है, जिसे संसद में पेश किया जाएगा। इस विधेयक ने एक प्रावधान पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय या राज्य के मंत्रियों को पद से स्वतः हटाने का प्रावधान है। (एएनआई)
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