
वॉशिंगटन. पूर्वी लद्दाख में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान में हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प को लेकर अमेरिकी अखबार ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिकी अखबार न्यूज वीक के मुताबिक, गलवान झड़प में चीन के 60 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। इतना ही नहीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ही इस पूरी झड़प के पीछे थे, लेकिन पीएलए इसमें फ्लॉप हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सीमा पर चीन की सेना की विफलता के परिणाम सामने आएंगे। चीनी आर्मी इस विफलता के बाद शी जिनपिंग से विरोधियों को बाहर करने और वफादारों की भर्ती करने के लिए कह चुकी है। ऐसे में अब बड़े अफसरों पर गाज गिरेगी।
भारत के खिलाफ एक और कदम उठाने के लिए जिनपिंग उत्तेजित
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अध्यक्ष भी हैं। वे भारत के खिलाफ एक और आक्रामक कदम उठाने के लिए उत्तेजित होंगे। 2012 में शी जिनपिंग के पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बनने के बाद से लगातार भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश में जुटी है।
गलवान हिंसा सोची समझी झड़प
तिब्बत के स्वायत्तशासी क्षेत्र में चीन की सेना लगातार युद्धाभ्यास कर रही है। 15 जून को चीन ने गलवान में भारत को चौंका दिया था। यह सोचा समझा कदम था। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, चीन को भी इसमें काफी नुकसान हुआ। लेकिन चीन ने अभी तक संख्या जारी नहीं की।
40 साल में पहली बार भिड़े भारत चीन के सैनिक
गलवान में भारत-चीन की सेना आमने सामने आ गई थीं। यह 40 साल में पहली खतरनाक भिड़ंत थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, विवादित इलाके में घुसना चीन की आदत है। गलवान में कम से कम 43 सैनिकों की जान गई। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के क्लिओ पास्कल के मुताबिक, यह आंकड़ा 60 के पार हो सकता है। भारतीय जवान बहादुरी से लड़े। चीन ने अभी तक अपना नुकसान नहीं बताया।
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