
हैदराबाद। प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)के कांग्रेस (Congress) में शामिल होने की अटकलों के बीच उनकी कंपनी ने तेलंगाना (Telangana)में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए केसीआर की पार्टी से अनुबंध कर लिया है। कंपनी आईपीएससी के साथ हो रहे अनुबंधों के मद्देनजर प्रशांत किशोर हैदराबाद में के.चंद्रशेखर राव (K.Chandrashekhar Rao) के अधिकारिक आवास पर डेरा डाले हुए हैं।
चंद्रशेखर राव की पार्टी के साथ पीके की कंपनी के अनुबंध और उनका कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों ने एक नए राजनीतिक गठजोड़ की ओर भी इशारा कर दिया है। माना जा रहा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पुनर्जीवन के लिए कई राज्यों में प्रतिद्वंद्वी पार्टियां भी उनके साथ आ सकती हैं। हालांकि, सबकुछ अब कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी के निर्णय पर टिका है।
2 मई तक हो सकता है पीके को लेकर फैसला
प्रशांत किशोर की कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी व अन्य केसाथ तीन राउंड की मीटिंग हो चुकी है। तीनों मीटिंग में प्रशांत किशोर कांग्रेस के पुनर्जीवन के लिए पूरा प्लान समझा चुके हैं। इन मीटिंग के बाद वह दो मई तक निर्णय लेने की डेडलाइन भी दे चुके हैं। पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी, दिग्गजों और राहुल गांधी की एक टीम के परामर्श से, सोमवार एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगी। इस मीटिंग में इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने की संभावना है।
हालांकि, कांग्रेस के दिग्गजों का एक वर्ग ऐसा भी है जो प्रशांत किशोर को लेकर सावधान रहना चाहता है। इनका मानना है कि कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी दलों तृणमूल कांग्रेस (TMC) व वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) के साथ भी वह हैं, ऐसे में वह पार्टी के साथ 100 परसेंट कैसे दे सकते हैं।
सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि श्रीमती गांधी ने श्री किशोर के प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के लिए बनाई गई विशेष टीम चाहती है कि वह अन्य सभी राजनीतिक दलों से अलग हो जाएं और खुद को पूरी तरह से कांग्रेस के लिए समर्पित कर दें।
केसीआर ने पीके को बताया था दोस्त
उधर, केसीआर की पार्टी के साथ प्रशांत किशोर की कंपनी के अनुबंध को लेकर यह दावा किया जा रहा था कि यह डील 300 करोड़ रुपये में हुई है। हालांकि, सीएम के.चंद्रशेखर राव ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे दोनों अच्छे दोस्त हैं। देश में व्यापक परिवर्तन मिलकर लाने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा, "प्रशांत किशोर पिछले 7-8 सालों से मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने कभी पैसे के लिए काम नहीं किया। वह एक वेतनभोगी कर्मचारी नहीं हैं। मुझे खेद है कि आप देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को नहीं समझते हैं।मैं राष्ट्रीय परिवर्तन लाने के लिए प्रशांत किशोर के साथ बातचीत कर रहा हूं। इस पर प्रशांत किशोर मेरे साथ काम कर रहे हैं। इससे किसे परेशानी हो सकती है? वे उसे बम के रूप में क्यों देख रहे हैं? वे क्यों रो रहे हैं?"
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