
जम्मू. हिमालय के दक्षिण में स्थित अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 5,700 तीर्थयात्रियों का दूसरा जत्था रवाना हुआ। कड़ी सुरक्षा के बीच बम बम भोले का नारा लगाते हुए तीर्थयात्री गुरुवार की सुबह 230 वाहनों के काफिले में भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुए। बाबा बर्फानी के गुफा मंदिर की 43 दिवसीय यात्रा का समापन 11 अगस्त को रक्षा बंधन के अवसर पर होगा।
अधिकारियों ने बताया कि दूसरे जत्थे के साथ जम्मू से अमरनाथ गुफा के लिए रवाना होने वाले तीर्थयात्रियों की कुल संख्या 10700 हो गई है। उन्होंने कहा कि 5,000 से 6,000 से अधिक नए तीर्थयात्री अमरनाथ की यात्रा के लिए देश भर के विभिन्न स्थानों से जम्मू पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि तीन काउंटरों पर मौके पर पंजीकरण किया जा रहा है। जबकि दो काउंटरों पर टोकन की आपूर्ति की जा रही है। उन्हें यहां के 32 लाजिंग सेंटर और बेस कैंप में रखा गया है।
कोविड से नहीं हुई थी यात्रा
देश में COVID-19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद वार्षिक अमरनाथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह तीर्थस्थल कश्मीर में हिमालय में समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसमें लिंगम नामक एक बर्फ की स्टैलेग्माइट संरचना है। भक्तों का मानना है कि लिंगम भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक है। यात्रा गुरुवार को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में पारंपरिक 48 किलोमीटर के नुनवान मार्ग और मध्य कश्मीर के गांदरबल में 14 किलोमीटर के बालटाल मार्ग से शुरू हुई। केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद अमरनाथ की यह पहली यात्रा है। 1 जुलाई से 1 अगस्त 2019 तक यात्रा को रद्द करने से पहले तक 3.42 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
8 लाख दर्शनार्थियों के पहुंचे का अनुमान
30 जून से 11 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान अमरनाथ यात्रा इस बार कई नए रिकॉर्ड बनाने जा रही है। माना जा रहा है कि पहली बार रिकार्डतोड़ 8 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। अब तक करीब 3 लाख लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इतने लोगों के लिए यहां 120 लंगर लगाए गए हैं। यहां 24 घंटे चूल्हे जल रहे हैं। पहली बार हेलिकॉप्टर से भी अमरनाथ यात्रा की जा सकेगी।
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