
मुंबई। देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वह 30 जनवरी से महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे। इस बार उनका मुद्दा है-महाराष्ट्र में लोकायुक्त एक्ट लागू करना, जो कई साल पहले पास तो हो गया था, लेकिन आज तक लागू नहीं हुआ। अन्ना हजारे ने इसे अपना "आखिरी आंदोलन" भी बताया है। इससे लोगों के बीच उत्सुकता और चिंता दोनों बढ़ गई हैं कि आखिर इतने वर्षों बाद उन्हें फिर से अनशन पर बैठने की जरूरत क्यों पड़ी?
अन्ना हजारे का कहना है कि लोकायुक्त कानून भ्रष्टाचार रोकने के लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने इसे पास तो कर दिया, राष्ट्रपति ने मंजूरी भी दे दी, लेकिन जमीन पर यह कानून अभी तक लागू नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात-अन्ना हजारे दावा करते हैं कि उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री को सात बार लेटर लिखा, लेकिन कोई जवाब तक नहीं मिला।
अन्ना हजारे का आरोप है कि सरकार लोगों की भलाई भूल गई है। रिपोर्टर्स से बात करते हुए अन्ना हजारे ने साफ कहा कि उन्हें बहुत दुख है कि एक जरूरी कानून को जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं सात लेटर लिख चुका हूं, लेकिन सरकार चुप है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि लोकायुक्त एक्ट लागू करने में इतनी देर क्यों हो रही है। सरकार लोगों की भलाई के लिए होती है, सिर्फ दिखावा करने के लिए नहीं। अन्ना हजारे का मानना है कि अगर लोकायुक्त लागू हो गया, तो भ्रष्टाचार पर बड़ी रोक लगेगी और सरकारी सिस्टम पारदर्शी होगा।
यह पहली बार नहीं है जब अन्ना हजारे ने लोकायुक्त की मांग को लेकर भूख हड़ताल की है। साल 2022 में भी उन्होंने रालेगण सिद्धि में आंदोलन किया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि मंत्री की मध्यस्थता के बाद संग्राम टला था। तब सरकार ने वादा किया था कि लोकायुक्त कानून जल्द लागू किया जाएगा। इसके बाद एक कमेटी भी बनी, ड्राफ्ट तैयार हुआ, और विधानसभा के दोनों सदनों से एक्ट पास भी हो गया। लेकिन अब 2025 आने वाला है, और अन्ना हजारे के मुताबिक कानून फाइलों में ही बंद पड़ा है।
लोकायुक्त एक्ट भ्रष्टाचार रोकने वाला कानून है। यह सरकार से लेकर प्रशासन तक, हर स्तर पर जवाबदेही तय करता है। कई नागरिक समूह और एक्टिविस्ट भी मानते हैं कि महाराष्ट्र में यह कानून लागू होना जरूरी है, क्योंकि कई बड़े घोटाले लगातार सामने आते रहे हैं। अन्ना हजारे के अनशन के एलान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है कि क्या सरकार इस बार झुकेगी? क्या लोकायुक्त एक्ट सच में लागू होगा? या फिर यह आंदोलन भी वादों में ही खत्म हो जाएगा?
2011 में जब अन्ना हजारे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे थे, तब पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा हो गया था। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। “इंडिया अगेंस्ट करप्शन” आंदोलन ने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया था। अन्ना हजारे अब कह रहे हैं कि यह आंदोलन उनका आखिरी संघर्ष होगा। इस बात ने उनके समर्थकों, एक्टिविस्ट्स और आम जनता को भी चिंतित कर दिया है। 83 साल की उम्र में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन कोई साधारण फैसला नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर इस बार भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो यह लोकतंत्र और जवाबदेही दोनों के लिए बड़ा सवाल होगा।
कानून का पास होना और लागू न होना-दो बिल्कुल अलग बातें हैं। हजारे का आरोप है कि सरकार सिर्फ़ दिखावा कर रही है, लेकिन जनता की भलाई के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने साफ कहा है कि “सरकार लोगों के लिए होती है, सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं।” सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब या तर्क न आने से यह मामला और रहस्यमय बन जाता है।
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