
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित सत्य विहार इलाके का माहौल उस समय दहशत से भर गया, जब एक नाइटक्लब और बार में अचानक भीषण आग भड़क उठी। रात के वक्त उठती लपटें और घना काला धुआं देखकर लोग घरों से बाहर निकल आए। आग किस वजह से लगी, इसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। इसी वजह से इस घटना के आसपास एक रहस्य भी बना हुआ है। यह हादसा ठीक उसी समय सुर्खियों में है, जब कुछ दिन पहले ही गोवा के एक बड़े नाइटक्लब में आग लगने से 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस वजह से भुवनेश्वर के लोगों में डर, सवाल और गुस्सा-तीनों तेजी से फैल रहे हैं।
आग इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में नाइटक्लब के अंदर भरपूर धुआं फैल गया। कई वीडियो सामने आए जिसमें दिखा कि पूरा बार धुएं से घिरा था और बाहर खड़े लोग भाग-दौड़ कर रहे थे। लोकल लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को कॉल किया। फायरफाइटर्स रिकॉर्ड समय में मौके पर पहुंचे और बिना देर किए आग बुझाने में जुट गए।आस-पास की इमारतें घनी आबादी में थीं, इसलिए खतरा और बढ़ गया था लेकिन फायर टीम की तेज कार्रवाई ने आग को फैलने से रोक लिया। उनकी मेहनत की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और अभी कोई अंतिम वजह सामने नहीं आई है। तीन संभावनाएं मुख्य रूप से जांच के दायरे में हैं:
लेकिन इनमें से सही वजह कौन-सी है-यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। यही मिस्ट्री इस घटना को और भी गंभीर बना रही है।
गोवा के नाइटक्लब में लगी आग और 25 लोगों की मौत ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर सवाल उठा दिए थे। इसी पृष्ठभूमि में ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (OFES) ने राज्यभर में 100 से ज़्यादा लोगों की क्षमता वाले सभी रेस्टोरेंट, बार और पब्लिक प्लेस का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट करने का आदेश दिया था। भुवनेश्वर की यह आग उसी बीच हुई है, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि नाइटक्लब वाले लंबे समय से भीड़ बढ़ा रहे थे और आग से बचाव के इंतज़ाम बहुत कमजोर थे। कई लोग दावा कर रहे हैं कि आपातकालीन निकास का रास्ता भी ठीक से खुला नहीं था। हालांकि अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि हर एंगल से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि गलती कहां हुई और किस पर कार्रवाई की जाएगी।
बार के पास कई घर, छोटे रेस्टोरेंट और दुकानें मौजूद हैं। अगर आग थोड़ी भी और फैलती, तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता था। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया। लगातार पानी की बौछार से तापमान कम किया। आसपास की इमारतों की दीवारों को भी पानी से ठंडा किया। बार के अंदर धुआं निकालने के लिए वेंटिलेशन बनाया। उनकी तेजी और तकनीकी समझ से बड़ी दुर्घटना टल गई।
फायर ब्रिगेड की टीम ने आग को समय रहते काबू में कर लिया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन घटना की तस्वीरें और वीडियो देखकर लोग अभी भी डरे हुए हैं। यह हादसा साफ कहता है कि नाइटक्लब, बार और रेस्टोरेंट में सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि जिंदगी और मौत का सवाल है।
कुछ दिनों पहले गोवा के एक प्रसिद्ध नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उसके बाद ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (OFES) ने पूरे राज्य में सख्त आदेश जारी किए थे, जिसके अनुसार:
लेकिन भुवनेश्वर की यह घटना बताती है कि कई जगहों पर यह जांच अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
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