
आगरा. हाल में अयोध्या विवाद अधिक चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है कुछ दिन बाद फैसला आने की संभावना है। ऐसे में देश भर में हिंदू मुस्लिम एकता की मिसला देती सैकड़ों कहानियां आपको मिल जाएंगी। कई ऐसे परिवार जहां दो अलग धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं तो कई ऐसे गांव जहां लोगों के दिलों में मंदिर-मस्जिद को लेकर कोई भेदभाव नहीं। ये मिसालें हमें देश में सामाजिक सोहार्द को बनाए रखने का पैगाम देती हैं। इसलिए एशियानेट अयोध्या विवाद के चलते सामाजिक सोहार्द और भाईचारे का पैगाम देते हैं।
किसी घर की एक ही छत के नीचे जब दो अलग धर्मों के लोग हों तो यह बात किसी को भी हैरान कर सकती है लेकिन हम आपको बता दें कि ऐसा उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ है जहां भगवान श्रीकृष्ण और पैगंबर मोहम्मद के उपदेश एक साथ पढ़े जाते हैं। गंगा जमुनी तहजीब का इससे बेहतरीन उदाहरण हो ही नहीं सकता है। हिंदू मुस्लिम दो अलग धर्म है और दो अलग संस्कृतियां भी। दोनों के ईष्ट अलग, रहन-सहन अलग लेकिन कई बार इनके बीच भाईचारे की मिसाल सामने आती रहती हैं। पर जब आप इस परिवार को देखेंगे तो आपको वाकई हैरानी होगी क्योंकि इस घर में एक ही अलमारी में गीता और कुरान विराजमान हैं।
एक ही अलमारी में सजी हैं गीता और कुरान
आगरा के खेड़ा साधन ऐसा गांव हैं, जहां कई घरों की एक ही अलमारी में आपको गीता और कुरान एक साथ रखी हैं। जहां दादी कुरान की आयतों की तिलावत करतीं हैं तो पोती रामचरित मानस के चौपाइयों को गाती है। औरंगजेब के डर से यहां कई लोगों ने इस्लाम कुबूल किया था, लेकिन मुगल साम्राज्य खत्म होते ही कई लोग वापस हिन्दू बन गए तो कई मुस्लिम ही रहे।
हिंदू चाचा का मुस्लिम भतीजा
यहां एक ही घर में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्म को मानने वाले रहते हैं। दिल्ली-आगरा हाइवे पर कीठम गांव से पश्चिम की ओर करीब 14 किलोमीटर दूर अछनेरा ब्लाक के गांव खेड़ा साधन गांव है। इस गांव में राजन नाम से एक शख्स रहते हैं जो पेशे से मैकेनिक हैं और हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं। उनके भतीजे का नाम असरार है। हिन्दू चाचा का मुस्लिम भतीजा? यह सुनकर कोई भी चौंक जाता है लेकिन इसकी सच्चाई जानकार लोगों के चेहरे पर मुस्कान तैर जाती है।
राजन ने बताया कि मेरे दादा दो भाई थे, जिसमें से एक मुस्लिम हो गए और मेरे दादा हिंदू ही रहे। ऐसे में दूसरे दादा से जो परिवार आगे बढ़ा, वह मुस्लिम ही बना रहा। लेकिन, हमारा रिश्ता खत्म नहीं हुआ। रिश्तेदारियां अभी भी चल रही हैं। दोनों परिवार सनातन और इस्लाम दोनों धर्मों को निभा रहे हैं।
दादा पोते के नाम सुनकर लगेगा झटका-
विजेंद्र सिंह नाम भले मुस्लिम लगे लेकिन वह इस्लाम धर्म को मानते हैं। हिन्दू नाम वाले विजेंद्र जी के दादा का नाम आशिक अली था। पिता का नाम कर्मवीर सिंह है। विजेंद्र ने बताया कि हमारे पूर्वज राजपूत थे, जिन्होंने इस्लाम अपना लिया था। हमारी यहां अभी भी राजपूत परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। हम लोगों को राजपूत मुस्लिम कहा जाता है लेकिन परिवार में अब दो धर्म माने जाते हैं।
परिवार में कोई करे निकाह तो कोई विवाह
राजन और असरार के परिवार की तरह यहां कई परिवार हैं, जहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों परंपराओं को मानने वाले लोग हैं। जिस उत्साह के साथ दीपावली मनाई जाती है, वही रौनक ईद पर भी होती है। परिवार के लोग एक-दूसरे के खुशी और गम में भी एक साथ खड़े रहते हैं। बस शादी समारोह में चाचा के यहां शादी पंडित कराते हैं तो भतीजे के यहां निकाह मौलवी पढ़ाते हैं। इस एक ही परिवार मुस्लिम परिवार निकाह करवाता है तो हिंदू परिवार विवाह और एक दूसरे के कामों में खुशी-खुशी शामिल होते हैं।
औरंगजेब के कार्यकाल में हुए थे धर्मपरिवर्तन
आगरा के गांव खेड़ा साधन में मुगल शासक औरंगजेब के कार्यकाल 1658 और 1707 के बीच धर्म परिवर्तन करावाए गए थे। तब लोगों से कहा गया था या तो इस्लाम अपना लो या गांव छोड़ दो। डर की वजह से गांव वालों ने इस्लाम अपना लिया था ऐसे में यहां अधिकतर लोग घुल-मिलकर ही रहते हैं।
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