
लखनऊ. अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद का सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निपटारा हो गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई ऐसी चीजों का भी जिक्र हुआ जिनके बारे में आज की नई पीढ़ी को ज्यादा जानकारी नहीं है। इन्हीं में से एक 'निहंग सिख' की कहानी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए इसका जिक्र भी किया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में अयोध्या में हिंदू-मुस्लिम विवाद को लेकर 1856-57 के एक दंगे का जिक्र किया। ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर बताया गया कि हनुमानगढ़ी, बाबरी मस्जिद को लेकर इसी झगड़े के बाद मस्जिद के बाहर रेलिंग लगा दी गई थी।
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कहां हुआ है सिख निहंग का जिक्र ?
28 नवंबर, 1858 को अवध के थानेदार शीतल दुबे की रिपोर्ट में सिख निहंग का जिक्र मिलता है। निहंग सिख को लेकर लिखा गया है, "पंजाब के निहंग सिख फकीर खालसा ने हवन किया और गुरु गोबिंद सिंह की पूजा की। फकीर खालसा ने मस्जिद परिसर (बाबरी) में भगवान श्रीराम के प्रतीक का निर्माण किया। पूजा के दौरान मौके पर 25 सिख भी सुरक्षा के लिए मौजूद थे।"
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निहंग सिख ने पेशी पर क्या कहा था?
बाद के कागजातों से यह भी पता चलता है कि जब निहंग सिख फकीर खालसा को समन किया गया तो उसने हर जगह के निरंकार से जुड़े होने जैसी बातें कही थीं। उस दौरान मस्जिद के मुअज्जिम सैय्यद मोहम्मद खातीब की अर्जी के मुताबिक, "मेहराब और इमाम के खड़े होने की जगह के पास चबूतरा बनाया गया। उस पर प्रतिमा की तस्वीर स्थापित की गई। पूजा और आग जलाकर हवन भी शुरू किया गया। मस्जिद में कोयले से कई जगह राम-राम भी लिख दिया गया।
इसी अर्जी में वैरागियों (हिंदू साधु) का भी जिक्र आया है। शहर कोतवाल के विवादित जगह पर आने, निर्माण को गिराने, हिंदुओं को बाहर निकालने, प्रतीकों को हटाने और दीवारों को साफ करने की बात है।
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