नई दिल्ली: बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा द्वारा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा में इस्तेमाल किये गये शब्दों पर निराशा व्यक्त की है।
एसोसिएशन ने कहा कि इस तरह का आचरण न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता के बारे में लोगों की अवधारणा कमजोर करता है।
कार्यपालिका से गरिमामय दूरी बनाकर रखें
एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि न्यायाधीशों का यह बुनियादी कर्तव्य है कि वे सरकार की कार्यपालिका शाखा से गरिमामय दूरी बनाकर रखें। बार एसोसिएशन आफ इंडिया के अध्यक्ष ललित भसीन ने कहा कि इस तरह का व्यवहार जनता के विश्वास को कम करता है क्योंकि शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे संविधान के सिद्धांतों को बरकरार रखेंगे तथा कानून के शासन को सर्वोपरि रखते हुये कार्यपालिका के खिलाफ फैसले करेंगे।
भसीन ने कहा, ‘‘बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की कार्य समिति का मत है कि इंटरनेशनल ज्यूडीशियल कान्फ्रेंस में धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते समय न्यायमूर्ति मिश्रा ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा में जो अतिरेकपूर्ण शब्द इस्तेमाल किये वे औपचारिक शिष्टाचार के नियमों से बाहर थे।’’
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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