
Rameshwaram Cafe Blast accused arrest: बेंगलुरू के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट केस में दो मुख्य आरोपियों की पश्चिम बंगाल से हुई गिरफ्तारी ने लोकसभा चुनाव में टीएमसी और बीजेपी को एक दूसरे पर आरोप लगाने का मुद्दा दे दिया है। बीजेपी आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय के ममता बनर्जी पर हमला बोले जाने के बाद मुख्यमंत्री ने एक जनसभा में बीजेपी को आड़े हाथों लिया है।
बंगाल के कूचबिहार के दिनहाटा में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि जो आरोपी अरेस्ट किए गए हैं वह बंगाल के निवासी नहीं हैं। वे यहां छिपे हुए थे। उन्हें दो घंटे में अरेस्ट कर लिया गया। टीएमसी नेता ने गुस्से में कहा कि अगर बंगाल में शांति है तो भाजपा इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। रैली में आई भीड़ से उन्होंने पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश सुरक्षित है? क्या राजस्थान सुरक्षित है? क्या बिहार सुरक्षित है?
टीएमसी नेता कुणाल घोष का आरोप-सुवेंदु अधिकारी की हो जांच
कैफे ब्लास्ट के मुख्य आरोपियों की गिफ्तारी के बाद टीएमसी के सीनियर लीडर कुणाल घोष ने कहा कि गिरफ्तार करने वाली एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को राज्य पुलिस का सक्रिय सहयोग स्वीकार करना होगा। उनकी प्रेस विज्ञप्ति में गिरफ्तारियों में राज्य पुलिस के सहयोग का उल्लेख है। घोष ने इस मामले में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के परिवार और रामेश्वरम कैफे हमलावरों के बीच संबंधों की जांच की मांग की है। घोष ने उन रिपोर्टों का भी हवाला दिया, जिनमें एनआईए ने बेंगलुरु के लोकप्रिय रामेश्वरम कैफे में 1 मार्च को हुए विस्फोट के सिलसिले में एक भाजपा कार्यकर्ता को हिरासत में लिया था और पूछताछ की थी, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे।
गौरतलब है कि कांथी भाजपा के सुवेंदु अधिकारी का गढ़ है। अधिकारी बीजेपी के नेता हैं। अधिकारी ने प्रतिष्ठित नंदीग्राम सीट से एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में ममता बनर्जी को हरा दिया था।
मालवीय के आरोप के बाद टीएमसी ने दिया जवाब
ममता बनर्जी और कुणाल घोष का यह जवाब तब आया जब भाजपा के अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शाजेब और ताहा की गिरफ्तारी के बारे में पोस्ट किया और कहा कि दोनों संभवतः कर्नाटक में आईएसआईएस सेल से संबंधित हैं। पश्चिम बंगाल आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है।
हालांकि, मालवीय की पोस्ट का पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी जवाब दिया। पुलिस ने कहा कि अमित मालवीय के दावों के विपरीत दोनों आरोपियों को उनके और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त अभियान के बाद गिरफ्तार किया गया था। पश्चिम बंगाल पुलिस की सक्रिय भूमिका को केंद्रीय एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। पश्चिम बंगाल कभी भी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहा है और राज्य पुलिस हमेशा सतर्क रहेगी।
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