
कोयंबटूर। सद्गुरु ने 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में प्रतिष्ठित 112 फीट के आदियोगी के सामने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को संदेश कि भारत को विश्व में समग्रता का नेता बनने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
सद्गुरु ने कहा कि पिछले 800 से 900 वर्षों में भारत को जितना तबाह किया गया उतना किसी और देश को नहीं किया गया। जब हम नरसंहार के बारे में बात करते हैं तो हम चंगेज खान, मूल अमेरिकी जनजातियों या अफ्रीकी लोगों को गुलाम बनाए जाने और हिटलर द्वारा लोगों को मारने के बारे में बात करते हैं। लेकिन मुझे आपको याद दिलाना चाहिए कि संख्या और नृशंस प्रकृति दोनों के मामले में किसी भी राष्ट्र ने भारत जितना विनाश नहीं देखा है।
गुलामी के लंबे कालखंड के बाद भी देश ने अपनी संस्कृति बरकरार रखा
सद्गुरु ने कहा, "गुलामी के लंबे कालखंड के बाद भी देश ने अपनी संस्कृति को बरकरार रखा। अब देश ने आर्थिक विकास और मानव विकास के मामले में मजबूती से वापसी की है। बहुत सी चीजें होने के बावजूद, लोगों ने अपना उत्साह बरकरार रखा। यह भावना कोई लड़ने की भावना नहीं है। यही भारत की सुन्दर प्रकृति है। यह तो एक जीवित आत्मा है। आम तौर पर राष्ट्र लड़ाई की प्रबल भावना के साथ खुद को सुरक्षित रखते हैं। यहां हमारी लड़ने की कोई भावना नहीं है। हम लड़ना नहीं चाहते। हम बस जीना चाहते हैं और हम चाहते हैं कि हर कोई जीवित रहे।"
जीवन की भावना होना चाहिए हमारा तरीका
देश के लिए आगे का रास्ता बताते हुए सद्गुरु ने कहा कि भारत ने हमेशा सभी को गले लगाया है। हमने संस्कृति, संगीत , विज्ञान, कारोबार और सबसे ऊपर आध्यात्मिक प्रक्रिया के साथ दुनिया को गले लगाया है। यह दुनिया को प्रभावित करने का तरीका है। आज हर कोई बात कर रहा है कि भारत से विश्व की भलाई की बात को फैलाया जाए। यहीं से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का जन्म हुआ। भारत को लड़ने की भावना की जरूरत नहीं है। जीवन की भावना होनी चाहिए। यही हमारा तरीका रहा है। भविष्य में भी यही हमारा तरीका होना चाहिए।
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