दुनिया की 7 अरब आबादी तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाना बड़ी चुनौती, 8 हजार जम्बो जेट्स 2 साल में पूरा कर पाएंगे मिशन

Published : Dec 01, 2020, 01:14 PM ISTUpdated : Dec 01, 2020, 01:15 PM IST
दुनिया की 7 अरब आबादी तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाना बड़ी चुनौती, 8 हजार जम्बो जेट्स 2 साल में पूरा कर पाएंगे मिशन

सार

दुनिया के कई देश इन दिनों कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन इस वैक्सीन को बनाना ही नहीं बल्कि इसे लोगों तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। दुनिया की 7 अरब आबादी तक ये वैक्सीन पहुंचाना आसान नहीं होगा। वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए 110 टन क्षमता वाले जम्बो जेट्स के 8000 फेरों की जरूरत होगी।

नई दिल्ली. दुनिया के कई देश इन दिनों कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन इस वैक्सीन को बनाना ही नहीं बल्कि इसे लोगों तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। दुनिया की 7 अरब आबादी तक ये वैक्सीन पहुंचाना आसान नहीं होगा। वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए 110 टन क्षमता वाले जम्बो जेट्स के 8000 फेरों की जरूरत होगी। 14 अरब डोज दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाने का यह मिशन दो साल चलेगा। वैक्सीन की डिलीवरी के लिए सिर्फ विमानों की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कार, बस, ट्रक और यहां तक कि मोटरसाइकिल, साइकिल की भी मदद लेनी पडे़गी। कुछ इलाकों में तो पैदल ही यह वैक्सीन लेकर जाना होगा।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि 110 टन क्षमता वाले बोइंग-747 विमानों को 8,000 चक्कर लगाने होंगे, तब वैक्सीन सब तक पहुंच सकेगी। इसके अलावा टेम्परेचर कंट्रोल और अन्य जरूरतों का भी विशेष ध्यान रखना होगा। खासकर फाइजर के वैक्सीन के लिए, जिसे UK और US के साथ-साथ यूरोपीय संघ के अन्य देशों में सबसे पहले अप्रूवल मिलने की उम्मीद है। इसे 6 महीने तक सेफ और इफेक्टिव रखने के लिए -70 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखने की जरूरत होगी। IATA के चीफ एलेक्जांद्रे डी जुनियाक का कहना है कि ‘यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल लॉजिस्टिक एक्सरसाइज रहने वाली है। पूरी दुनिया की नजरें अब हम पर हैं।’

 

लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना काफी मुश्किल काम:WHO 
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े कार्गो कैरियर्स में से एक लुफ्थांसा ने अप्रैल में ही वैक्सीन डिलीवरी की योजना पर काम शुरू कर दिया था। 20 लोगों का टास्क फोर्स बनाया ताकि मॉडर्ना, फाइजर या एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया जा सके। टास्क फोर्स के सामने सवाल थे कि एयरलाइन के 15 बोइंग 777 और MD-11 मालवाहक जहाजों में जगह कैसे बनाई जाए? लुफ्थांसा में इस टास्क फोर्स के प्रमुख थॉर्टन ब्रॉन के मुताबिक हमारे सामने सवाल यह है कि क्षमता को बढ़ाएं कैसे?' वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) में इम्युनाइजेशन चीफ कैथरीन ओ'ब्रायन ने पिछले हफ्ते कहा था कि वैक्सीन डिलीवर करना माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने से भी मुश्किल काम है। महीनों की मेहनत के बाद वैक्सीन बना लेना यानी सिर्फ एवरेस्ट के बेस कैम्प तक पहुंचना ही है। 
 

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

कौन हैं NIA के नये मुखिया राकेश अग्रवाल? जानिए इनका पूरा ट्रैक रिकॉर्ड
Odisha Crime: खेलती बच्ची को बहलाकर ले गया दादा, फिर जो हुआ उसने सबको हिला दिया