बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय पर भाजपा डाल रही डोरे, जानिए क्या इस रणनीति के पीछे की वजह

Published : Dec 12, 2020, 03:46 PM ISTUpdated : Dec 12, 2020, 04:38 PM IST
बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय पर भाजपा डाल रही डोरे, जानिए क्या इस रणनीति के पीछे की वजह

सार

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य में राजनीति हिंसा तेज हो गई है। ऐसे में भाजपा पश्चिम बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय के लोगों को राज्य के हालात की जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के अभियान चला रही है। बंगाली समुदाय देश  के कोने-कोने में बसा है और देश व समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा रहा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की सास और अभिनेत्री जया भादुड़ी की मां से भोपाल में उनके घर जाकर मुलाकात की, और उन्हें बंगाल के हालात की जानकारी दी। जया भादुड़ी की मां बंगाल की है और कई सालों से भोपाल में रह रही है। 

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य में राजनीति हिंसा तेज हो गई है। ऐसे में भाजपा पश्चिम बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय के लोगों को राज्य के हालात की जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के अभियान चला रही है। बंगाली समुदाय देश  के कोने-कोने में बसा है और देश व समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा रहा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की सास और अभिनेत्री जया भादुड़ी की मां से भोपाल में उनके घर जाकर मुलाकात की, और उन्हें बंगाल के हालात की जानकारी दी। जया भादुड़ी की मां बंगाल की है और कई सालों से भोपाल में रह रही है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्य की 48 विधानसभा सीटों की ज़िम्मेदारी संभालने वाले नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "हमारी कोशिश है कि बंगाल से बाहर रहने वाले ज्यादा से ज्यादा लोगों को बंगाल में BJP से जोड़ें। जल्द ही मध्य प्रदेश में रहने वाले बंगाली समुदाय के और भी लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। ऐसे हमने राजनीतिक मामलों के जानकार से बीजेपी की इस रणनीति को समझा।  


दूसरे प्रदेशों में बसे बंगालियों को प्रभावित करने की कोशिश 
भाजपा पश्चिम बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय के लोगों को राज्य के हालात की जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के अभियान चला रही है। इस अभियान से वो बंगाल में बसे लोगों को प्रभावित करना चाहती है।  जिससे बीजेपी ये साबित कर सके कि वो उनकी हितैषी पार्टी है। वहां के रहवासियों के निकट बताने के लिए पूरे देश में बीजेपी के बड़े नेता लोगों से मिलेंगे। 

पश्चिम बंगाल के लोगों में बीजेपी की साफ छवि बनाना 
बंगाल के बाहर बसे बंगाली समुदाय के लोगों तक पहुंचने के पीछे बीजेपी की रणनीति है वो बंगाल के लोगों में अपनी साफ छवि बनाना चाहती है। TMC के सामने अपनी दमदारी को मजबूत करना चाहती है।  

बीजेपी ने 360 डिग्री प्लान का हिस्सा 
बीजेपी ने 360 डिग्री रणनीति बनाई है, जिसमें शाह का अद्भुत संगठन कौशल धुरी की भूमिका निभा रहा है। और यही कारण है कि गृह मंत्री का पदभार संभालने के बावजूद अमित शाह ही बंगाल चुनाव के अग्रिम मोर्चे पर खड़े दिख रहे हैं। कहा ये भी जाता है कि शाह को गृह मंत्रालय देने के पीछे अन्य कई कारणों में बंगाल की रणीनीति भी एक थी। 

बंगाल में मुसलमानों की बड़ी संख्या बनी चुनौती 
पार्टी की एक अन्य विशाल चुनौती बंगाल में मुसलमानों की बड़ी संख्या है, जिनमें लाखों के बंगलादेशी घुसपैठिए होने का भी संदेह है। बंगाल की मुस्लिम जनसंख्या बीजेपी के लिए कितनी बड़ी समस्या है, इसे केवल इसी से समझा जा सकता है कि राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 125 पर मुस्लिम मत 20% से ज्यादा हैं और किसी को भी विजेता बनाने का बूता रखते हैं। इनमें से ज्यादातर दक्षिण बंगाल की उन 9 लोकसभा क्षेत्रों में आती हैं, जहां से बीजेपी अपना एक भी सांसद दिल्ली भेजने में सफल नहीं हो सकी।

सीटों का गणित
इन 125 सीटों में से 2006 में वाम मोर्चा ने 102 सीटें जीती थीं, जबकि 2016 में 90 सीटें ममता बनर्जी की झोली में आ गिरीं। यहां तक कि 2019 लोकसभा चुनाव में भी इन 125 सीटों में से 93 में तृणमूल कांग्रेस ने बढ़त बनाई, जबकि महज 23 में बीजेपी को बढ़त मिल सकी। यदि इसी रुझान को विधानसभा नतीजों में बदल दिया जाए, तो 200+ तक पहुंचने की तो बात ही भूल जाइए, बीजेपी के लिए सामान्य बहुमत भी लोहे के चने चबाने जैसा काम होगा क्योंकि उसे बाकी बची 169 सीटों में 125 सीटें जीतनी होंगी। ऐसे में बीजेपी दो रणनीतियों पर काम करना चाहेगी। पहला, हिंदू वोटों का ध्रवीकरण और दूसरा, मुस्लिम वोटों का विभाजन।

बंगाल में क्या मुद्दे हैं?
गरीबी, बेरोजगारी, किसानों को उत्पादन का मूल्य नहीं मिलता, तुष्टीकरण की नीति है, हिंसा की राजनीति है। इस सब चीजों को जनता भुगत रही है। इसलिए जनता चाह रही है कि ऐसी सरकार आए, जो साफ सुधरी हो, निष्पक्ष हो, जो सभी के लिए काम करे। जहां तुष्टीकरण ना हो। सबका साथ सबका विश्वास हो। लोगों को लगता है कि मोदीजी के नेतृत्व में ही ऐसी सरकार बन सकती है। इसलिए लोगों में भाजपा और मोदी जी में विश्वास बढ़ा है।

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