
नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरोध में किसान सड़कों पर हैं। अब इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आंदोलन में माआवोदियों और वामपंथियों के शामिल होने की बात कही। इस पर भाजपा की सहयोगी रही अकाली दल ने नाराजगी जाहिर की। अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने कहा, ऐसे बयान देने वाले केंद्रीय मंत्रियों को माफी मांगनी चाहिए।
क्या कहा था पीयूष गोयल ने ?
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था, किसानों का आंदोलन वामपंथियों और माओवादियों के हाथों में है। इस पर किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर ऐसा है, तो केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को उन्हें पकड़ना चाहिए। अगर प्रतिबंधित संगठनों के लोग किसान आंदोलन के बीच में घूम रहे हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हमें तो यहां ऐसा कोई नहीं मिला। अगर मिलेगा तो भगा देंगे।
पूर्व सहयोगी बादल ने साधा सरकार पर निशाना
कृषि कानूनों के विरोध में एनडीए से बाहर आई अकाली दल ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा, केंद्र सरकार किसानों की आवाज दबा रही है। केंद्र जिनके लिए यह कानून लेकर आया है, वही किसान इन्हें लागू होते नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार किसानों की आवाज सुनने की बजाय उसे दबा रही है। किसान नए कानून नहीं चाहते।
उन्होंने कहा, मैं पीएम से गुजारिश करूंगा कि किसानों की बात सुनें। बादल ने आंदोलन को खालिस्तानियों और राजनीतिक दलों से जोड़ने वाले बयानों पर नाराजगी जाहिर की। बादल ने कहा कि वे ऐसे बयानों और केंद्र के रवैये की निंदा करते हैं। बादल ने कहा, जब किसानों को एंटी नेशनल कहा जाता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई असहमति भी नहीं जताता।
केंद्र के प्रस्ताव पर किसानों ने नहीं दी प्रतिक्रिया
उधर, किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर डटे हैं। किसानों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। देश के कई टोल प्लाजाओं को टैक्स फ्री किया गया है। वहीं, केंद्र ने एक बार फिर किसान संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन किसानों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
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