एक दिन में तीन प्रदेशों में प्लान्ट से जहरीली गैस लीक, लोग कहीं हुए बेहोश तो कहीं बिछ गईं लाशें

Published : May 07, 2020, 07:57 PM IST
एक दिन में तीन प्रदेशों में प्लान्ट से जहरीली गैस लीक, लोग कहीं हुए बेहोश तो कहीं बिछ गईं लाशें

सार

तमिलनाडु के कडलूर जिले में नेवली लिग्वाइन कारपोरेशन के प्लांट में धमाका हो गया, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। अभी यह नहीं पता चल सका है कि धमाके के पीछे की वजह क्या है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरा ध्यान लोगों को घटमा स्थल से निकालने में दिया जा रहा है। 

नई दिल्ली. तमिलनाडु के कडलूर जिले में नेवली लिग्वाइन कारपोरेशन के प्लांट में धमाका हो गया, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। अभी यह नहीं पता चल सका है कि धमाके के पीछे की वजह क्या है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी पूरा ध्यान लोगों को घटमा स्थल से निकालने में दिया जा रहा है। जहां तक जांच का सवाल है तो प्लांट तो खुद अपने स्तर पर जांच करेगी, लेकिन पुलिस भी मामले की जांच करेगी। गुरुवार को एक के बाद एक तीन प्लान्ट में हादसे की खबर आई।   

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में फैक्ट्री में गैस लीक
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की एक फैक्ट्री में गैस लीक हुई। रायगढ़ में मौजूद तेतला में शक्ति पेपर मिल में जहरीली गैस की चपेट में आने के बाद 7 मजदूरों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया है। तीन मज़दूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें इलाज़ के लिये रायपुर रवाना किया गया है।

- बिलासपुर रेंज के आईजी पुलिस दीपांशु काबरा ने कहा, लॉकडाउन के कारण बंद पड़ी एक कागज फैक्ट्री में साफ सफाई का काम चल रहा था। उसी समय किसी जहरीली गैस का रिसाव हुआ और काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गये।

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में प्लांट में गैस लीक
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक प्लांट (एलजी पॉलिमर) से स्टीरीन  गैस लीक होने से 11 लोगों की मौत हो गई। 5 हजार से ज्यादा लोग इससे बीमार हैं। बीमार का मतलब कुछ लोग उल्टियां कर रहे हैं, कुछ बेहोश हैं, कुछ सांस नहीं ले पा रहे हैं। किंग जॉर्ज अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि प्लांट से रिसने वाली गैस का नाम स्टीरीन है, जो गैस के संपर्क में आने वालों के दिमाग और रीढ़ पर असर करती है। बाहरी वातावरण में आने के बाद स्टीरीन ऑक्सिजन के साथ आसानी से मिक्स हो जाती है। नतीजतन हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है। 

- गैस का ऐसा प्रभाव दिखा कि लोग सड़कों पर ही बेहोश होने लगे। इंसान क्या जानवर भी जहां बैठे या लेटे थे, वहीं पर पहले बेसुध हुए और फिर मौत हो गई। चश्मदीद ने बताया कि करीब 4 बजे से ही अफरा-तफरी मच गई थी। प्लान्ट के 3 किमी. के रेडियस में जहरीली गैस का प्रभाव देखा गया।

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