यौन उत्पीड़न केस: बृजभूषण सिंह की ओर से अंतिम दलीलें पूरी, फैसला जल्द

Published : Jun 30, 2026, 03:30 PM IST
Representative Image (File Photo/ANI)

सार

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न केस में पूर्व WFI चीफ बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अंतिम बहस पूरी हो गई है। कोर्ट में सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। बुधवार को शिकायतकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, जिसके बाद कोर्ट फैसला सुरक्षित रख सकता है।

नई दिल्ली [भारत], 30 जून (एएनआई): राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को महिला पहलवानों द्वारा दायर कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय जनता पार्टी सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अंतिम दलीलें सुनीं।

सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर महिला पहलवानों द्वारा डब्ल्यूएफआई प्रमुख के रूप में सिंह के कार्यकाल के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में मुकदमा चल रहा है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने सिंह और विनोद तोमर की ओर से पेश अंतिम दलीलों को सुना। अधिवक्ता राजीव मोहन ने अधिवक्ता रेहान खान और ऋषभ भाटी के साथ आरोपी का प्रतिनिधित्व किया। बहस के दौरान सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया। अदालत ने बुधवार को शिकायतकर्ताओं की ओर से अंतिम दलीलें सुनने के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है, जिसके बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखने की संभावना है।

अब तक की जांच और कार्रवाई

इससे पहले, इस साल 12 मई को, अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) के एक सदस्य का बयान दर्ज किया था। जांच अधिकारी का बयान भी दर्ज किया जा चुका है।

यह मामला महिला पहलवानों द्वारा दायर शिकायतों से उपजा है, जिन्होंने जंतर-मंतर पर बृजभूषण शरण सिंह द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी शिकायतों के आधार पर, दिल्ली पुलिस ने एक प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू की। जांच के बाद, दिल्ली पुलिस ने 15 जून, 2023 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ लगभग 1,500 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया। आरोप पत्र भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354, 354ए, 354डी, और 506 (1) के तहत दायर किया गया था।

विनेश फोगाट को भेजा गया था नोटिस

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने 9 मई को विनेश फोगाट को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसमें तीन बार की ओलंपियन पर अनुशासनहीनता और कथित डोपिंग रोधी उल्लंघन का आरोप लगाया गया था और उन्हें गोंडा में राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। (एएनआई)

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