Aishwarya Rituparna Pradhan का सफर ओडिशा के गांव से सिविल सर्विस तक पहुंचने की कहानी है। जानिए स्कूल में भेदभाव, 2010 की Odisha Civil Services परीक्षा और ट्रांसजेंडर पहचान सार्वजनिक करने का पूरा सफर।

Aishwarya Rituparna Pradhan: जिंदगी में मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान हर बाधा को पार कर सकता है। ओडिशा के एक छोटे से गांव से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुँचने वाली ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की कहानी कुछ ऐसी ही प्रेरणा देती है। उन्होंने समाज के तानों और भेदभाव को पीछे छोड़ते हुए वह मुकाम हासिल किया, जो आज के समय में लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुका है। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की पूरी दास्तान।

Aishwarya Rituparna Pradhan: स्कूल में शुरू हुआ संघर्ष

ऐश्वर्या का जन्म कंधमाल के कनाबागिरी गांव में रतिकांत प्रधान के रूप में हुआ था। उन्होंने बताया है कि छठी कक्षा के आसपास ही उन्हें महसूस होने लगा था कि उनकी पहचान दूसरों से अलग है। स्कूल में उनके व्यवहार और व्यक्तित्व को लेकर टीचर और दूसरे बच्चे मजाक उड़ाते थे। कॉलेज के दिनों में भी मुश्किलें कम नहीं हुईं। भुवनेश्वर में पढ़ाई के दौरान उन्हें भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी शिक्षा और भविष्य को बेहतर बनाने पर केंद्रित रखा।

Odisha Civil Service: 2010 में पास की परीक्षा

ऐश्वर्या ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), ढेंकनाल से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई की। 2010 में उन्होंने Odisha Civil Services परीक्षा पास की और Odisha Financial Service में Commercial Tax Officer के तौर पर नियुक्त हुईं। उस समय सरकारी रिकॉर्ड में उनकी पहचान पुरुष के रूप में दर्ज थी।

उच्च शिक्षा और भुवनेश्वर का सफर

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐश्वर्या आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर आ गईं। यहां उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने के साथ-साथ प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज़्म की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज और हॉस्टल के माहौल में भी उन्हें अपनी पहचान की वजह से भेदभाव और ताने सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने अपने हौसलों को टूटने नहीं दिया और प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना संजोए रखा।

Transgender Identity: 2014 के बाद बदली जिंदगी

15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर लोगों को तीसरे जेंडर के रूप में कानूनी पहचान दी। इसके बाद ऐश्वर्या ने अपनी पहचान सार्वजनिक करने का फैसला किया। अप्रैल 2014 के बाद उन्होंने साड़ी पहनना शुरू किया और अपने नाम व जेंडर में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। 2015 में उन्होंने अपनी नई पहचान के साथ आधिकारिक रूप से सामने आना शुरू किया। समाज के दवाब के आगे झुकने के बजाय वह अपनी पहचान पर पूरी तरह अडिग रहीं। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें देश की पहली ट्रांसजेंडर सिविल सर्वेंट के रूप में सराहा गया है। उनका यह सफर साबित करता है कि सच्ची लगन और दृढ़ संकल्प से हर सामाजिक दीवार को गिराया जा सकता है।