
बलिया. अयोध्या मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय पर बसपा के सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि सर्वसम्मति से दिए गए कोर्ट के फैसले पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। गाजीपुर से बसपा के सांसद अंसारी ने रविवार रात कहा कि मुस्लिम रहबर और रहनुमा बोलते रहे हैं कि अयोध्या मामले पर वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे तो फिर किसी को भी न्यायालय के फैसले पर अब आपत्ति नही होनी चाहिए। उधर, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल कर दी है।
अफजाल अंसारी से बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी के बयान कि 99 फीसदी मुसलमान पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के पक्ष में हैं और न्यायालय के फैसले से न्यायपालिका में भरोसा कमजोर हुआ है, के बारे में पूछा गया तो सांसद ने कहा कि उनका व्यक्तिगत विचार है कि फैसले को स्वीकार किया जाना चाहिए।
'स्वीकार होना चाहिए फैसला'
यही नहीं उन्होंने कहा कि वह अपने विचार किसी पर थोप नहीं रहे हैं और न ही किसी के वक्तव्य का खंडन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले पर पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से संविधान एवं कानून सम्मत फैसला दिया। यह दबंगई या जबर्दस्ती का फैसला नहीं है। अंसारी ने कहा कि दोनों पक्षों में समझौते से हल नहीं निकलने के बाद यह फैसला आया है, जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है
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