Census 2027: डिजिटल होगी भारत की अगली जनगणना, संसद में सरकार ने बताया पूरा प्रॉसेस

Published : Dec 09, 2025, 04:43 PM ISTUpdated : Dec 09, 2025, 05:27 PM IST
Census 2027

सार

Census 2027 Government Notification: भारत की जनगणना 2027 पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए लोग खुद भी अपनी जानकारी भर सकेंगे। माइग्रेशन, जन्म स्थान और मौजूदा पते जैसी अहम जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जमा की जाएगी। 

India Census 2027: भारत की अगली जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि जनगणना 2027 में डेटा लेने के लिए मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का इस्तेमाल होगा। उनका कहना है कि ये बदलाव जनगणना को तेज, आसान और भरोसेमंद बनाने में मदद करेंगे। यह जानकारी समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे के सवाल के जवाब में दी गई। उन्होंने पूछा था कि अगली जनगणना में कौन-कौन से तकनीकी बदलाव होंगे और माइग्रेंट वर्कर्स की गिनती कैसे होगी?

जनगणना 2027 पर सवाल क्या था?

सनातन पांडे ने सरकार से पूछा कि अगली जनगणना में कौन-कौन से नए तकनीकी तरीके अपनाए जाएंगे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि मोबाइल ऐप या क्लाउड सिस्टम का इस्तेमाल होगा या नहीं। इसके अलावा, माइग्रेंट वर्कर्स और अस्थायी निवासी सही तरीके से गिने जाएंगे या उनके लिए अलग व्यवस्था होगी। उन्होंने पूरी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी।

सरकार ने क्या जवाब दिया?

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगा। डेटा मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए लिया जाएगा। इसका मतलब है कि लोग घर बैठे अपनी जानकारी भर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन और मॉनिटरिंग एक डिजिटल पोर्टल के जरिए होगी। हर व्यक्ति की जानकारी उसी जगह पर रिकॉर्ड की जाएगी, जहां उन्हें गणना के दौरान पाया जाएगा। माइग्रेशन डेटा में जन्मस्थान, पिछले निवास स्थान, मौजूदा जगह पर कितने समय से रह रहे हैं और माइग्रेशन का कारण शामिल होगा। जनगणना के सभी सवाल (Census 2027 Questionnaire) फील्ड वर्क शुरू होने से पहले ऑफिशियल गजट में जारी किया जाएगा, ताकि लोग पहले से जान सकें कि उनसे कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे।

 

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

भारत की पहली पूरी डिजिटल जनगणना होने से डेटा कलेक्ट करना तेज और आसान होगा और गलतियों की आशंका कम होगी। डिजिटल मॉनिटरिंग के कारण पूरी जनगणना की प्रक्रिया पर रियल टाइम निगरानी बनी रहेगी। माइग्रेंट वर्कर्स और अस्थायी निवासी भी सही तरीके से गिने जाएंगे। यह बदलाव सरकारी योजनाओं और नीति बनाने में भी मदद करेगा।

 

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