सीएए के खिलाफ उच्च न्यायालयों में दायर याचिकाओं के स्थानांतरण के लिये सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केंद्र

Published : Jan 08, 2020, 05:08 PM IST
सीएए के खिलाफ उच्च न्यायालयों में दायर याचिकाओं के स्थानांतरण के लिये सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केंद्र

सार

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की संवैधानिक वैधता के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर याचिकाओं के उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरण के लिये केन्द्र ने बुधवार को शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की संवैधानिक वैधता के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर याचिकाओं के उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरण के लिये केन्द्र ने बुधवार को शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि केन्द्र की स्थानांतरण याचिका पर 10 जनवरी को सुनवाई की जायेगी।

हालांकि पीठ ने कहा, ''पहली नजर में हमारा मत है कि नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की उच्च न्यायालयों को सुनवाई करनी चाहिए और अगर इस मामले में परस्पर विरोधी मत हुये तो हम इस पर गौर कर सकते हैं।''

नागरिकता संशोधन कानून के मामलों की सुनवाई

केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालयों द्वारा परस्पर विरोधी दृष्टिकोण अपनाने से समस्या हो सकती है और वकीलों को भी इससे संबंधित कार्यवाही में शामिल होने के लिये अलग अलग राज्यों का दौरा करना पड़ेग। शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के मामलों की सुनवाई के लिये वकीलों का अलग अलग राज्यों में जाना उसकी प्राथमिकता नहीं है।

मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि इसी तरह की एक याचिका कर्नाटक उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध है। इस पर न्यायालय ने कहा कि स्थानांतरण याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की जायेगी। शीर्ष अदालत इससे पहले 18 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता की विवेचना के लिये तैयार हो गया था लेकिन उसने इसके अमल पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।

सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया 

नागरिकता संशोधन कानून में 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। शीर्ष अदालत ने इस कानून को चुनौती देने वाली 59 याचिकाओं पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया था और इसे जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया था।

शीर्ष अदालत में नागरिकता संशोधन कानून की वैधता को चुनौती देने वालों में कांग्रेस के जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, राजद नेता मनोज झा, एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, पीस पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, गैर सरकारी संगठन 'रिहाई मंच' और 'सिटीजंस अगेन्स्ट हेट', अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और कानून के छात्र शामिल हैं।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

गैंगस्टर अबू सलेम को 14 दिन की पैरोल देने से सरकार का इनकार, अब क्या बचा आखिरी रास्ता?
45 लाख के गहने देख भी नहीं डोला मन, सफाईकर्मी की ईमानदारी देख सीएम ने दिया इनाम