
नई दिल्ली: वक्फ कानून संशोधन मामले में कोर्ट से बड़ा झटका टालने के लिए केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है। मुस्लिमों समेत अन्य लोगों द्वारा वक्फ भूमि के बारे में दी गई शिकायतों का विवरण कोर्ट में हलफनामे के साथ देने की तैयारी है। संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने कहा कि अगर वक्फ कानून संशोधन को असंवैधानिक घोषित किया जाता है तो वह इस्तीफा दे देंगे।
वक्फ कानून संशोधन के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगने से बड़ा झटका लगा है, ऐसे में केंद्र सरकार कोर्ट में और दस्तावेज देने की कोशिश में है। पहले दिन कोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ठीक से जवाब नहीं दे पाए। बीजेपी के कुछ लोगों का मानना है कि यही झटके की वजह है। कल सरकार ने खुद कोर्ट में यह आश्वासन दिया कि वक्फ संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं होगा, जिससे बिल के खिलाफ आदेश आने से बच गया।
मामले की अगली सुनवाई 5 मई को है, उससे पहले केंद्र सरकार को वक्फ संपत्तियों के बारे में मिली शिकायतें कोर्ट को सौंपने की तैयारी है। सरकार का तर्क होगा कि कई जगहों पर इससे लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं और ऐसे मामलों में दखल देने का अधिकार सरकार को मिलना चाहिए। मुनांबम निवासियों द्वारा दी गई शिकायत को भी शामिल किए जाने की संभावना है।
उपयोग के आधार पर वक्फ घोषित की गई संपत्तियों में भी बदलाव नहीं होना चाहिए, यह कोर्ट का रुख है। लेकिन सरकार यह अपील करेगी कि केवल पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को ही यथावत रखा जाए और बाकी पर रोक न लगाई जाए। कल शाम को एक उच्च स्तरीय बैठक में मामले की आगे की कार्रवाई पर विचार किया गया। बिल पर जेपीसी की रिपोर्ट का अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कानून में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के दखल से बिल के खिलाफ वोट देने वाले सभी दलों को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस इसे संविधान की जीत बता रही है। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर कोर्ट का रुख यह तय करेगा कि कानून लागू हो पाएगा या नहीं।
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