
नई दिल्ली। भारत में कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है। इसी बीच आरोप लग रहे हैं कि राज्यों को वैक्सीन की सप्लाई में भेदभाव किया जा रहा है। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि हमारा उद्देश्य यह नहीं कि वैक्सीन कौन-कौन चाह रहा, हम इस पर फोकस कर रहे कि वैक्सीन की जरुरत किसको है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि वैक्सीनेशन के मामले में हम एक डायनेमिक सप्लाई डिमांड मैपिंग माॅडल पर काम कर रहे हैं। जुलाई तक चलाए जाने वाले पहले फेज के वैक्सीनेशन में वैक्सीन डोज उनके लिए ही केवल उपलब्ध रहेगी जिसको सबसे अधिक जरूरत है। वैक्सीनेशन अभियान को लेकर महत्वपूर्ण सवालों के जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने दिए हैं।
Question 1: आपने कहा कि वैक्सीन मांग के अनुसार नहीं बल्कि जरुरत के मुताबिक दी जाएगी। इस बयान के पीछे आपका क्या उद्देश्य है ?
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण: वैक्सीनेशन का सबसे पहला उद्देश्य मृत्युदर को रोकना है। इसलिए इसको सबसे पहले ऐसे लोगों को डोज देना है जिनके संक्रमित होने की आशंका सबसे प्रबल है। जरुरतमंदों को टीका न देकर क्यों किसी खास गु्रप या वर्ग को उपलब्ध कराई जाए। आपको बता दें कि जुलाई तक आसपास तक वैक्सीनेशन का पहला चरण है। इस चरण में वैक्सीन की उपलब्धता सीमित है। इसलिए इस फेज में उसको पहले डोज दिया जाएगा जिसको सबसे अधिक जरुरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी यही सलाह दी है।
हम वैक्सीनेशन की सप्लाई अपने डायनेमिक सप्लाई डिमांड मैपिंग माॅडल के आधार पर कर रहे हैं। इसके डेटा के आधार पर ही हम यह संभावना तलाशते हैं कि किस उम्र वर्म के लिए कब से टीकाकरण प्रारंभ होगा। टीका की उपलब्धता में कोई कमी न हो इसलिए हम लगातार वैक्सीन निर्माता कंपनियों के संपर्क में हैं। एक टीम सीरम इंन्स्टीच्यूट व भारत बाॅयोटेक में विजिट किया था ताकि हम अपनी जरुरतों के बारे में बता सकें और उनकी आवश्यकताओं को भी समझ सकें। आने वाले महीनों में वैक्सीन प्रोडक्शन बढ़ाने पर भी काम हो रहा है। वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद हम दूसरे उम्र वर्ग के लिए वैक्सीनेशन प्रारंभ करेंगे।
Question 2: यह कहा जा रहा है कि वैक्सीनेशन में ब्यूरोक्रेसी का अत्यधिक हस्तक्षेप है और राज्य का अधिक नियंत्रण है?
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण: यह भ्रम है कि राज्य का वैक्सीनेशन पर नियंत्रण व प्रभाव है। हम सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं कि प्राइवेट सेक्टर के हास्पिटल्स भी वैक्सीनेशन में पार्टनर बनें। हालांकि, राज्यों को भी लगातार यह कहा जा रहा है कि वह आवश्यक उपाय करें ताकि प्राइवेट सेक्टर भी पार्टनरशिप कर वैक्सीनेशन में योगदान दे सकें। कई जगह 24 घंटे की वैक्सीनेशन की सुविधा प्राइवेट सेक्टर दे रहे हैं। ऐसे प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए ताकि अन्य लोग भी इससे जुड़ें।
Question 3: कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि भारत में वैक्सीन बनाने वाली दूसरी कंपनियों को इजाजत नहीं दिया जा रहा। कितनी सच्चाई है इस आरोप में ?
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण: यह बिल्कुल ही सत्य नहीं है। असलियत यह है कि भारत सरकार लगातार वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के संपर्क में है। हम वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को फंडिंग, अन्य सपोर्ट देने का खुला निमंत्रण दे रहे हैं। हालांकि, वैक्सीन को भारत में अनुमति देने के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है। यह प्रक्रिया ब्यूरोक्रेसी की वजह से नहीं बल्कि देशवासियों की सेहत व स्वास्थ्य की वजह से है। कुछ लोग आरोप लगाएंगे लेकिन भारत के लोगों की जान से खिलवाड़ तो नहीं किया जा सकता है। जब हम किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को वैक्सीन डोज देते हैं तो उसके एक-एक पल की स्वास्थ्य रिपोर्ट ली जाती है ताकि किसी प्रकार का असुविधा न हो सके।
(ANI)
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