
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि विवाह कार्यक्रम या किसी और उत्सव के दौरान फिल्मी गाने बजाने पर कॉपी राइट का मामला नहीं बनेगा। इसके लिए कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
विवाह समारोह में फिल्मी गाने बजाने को लेकर कॉपी राइट के कई शिकायतें दर्ज की गई। इससे आम लोगों को परेशानी हो रही थी। इसके साथ ही हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की मुसीबतें भी बढ़ रहीं थी। इसे देखते हुए सरकार ने आदेश जारी किया।
DPIIT को मिली थी कॉपीराइट अधिनियम के उल्लंघन की शिकायतें
DPIIT (Department for Promotion, Industry, and Internal Trade) ने नोटिस जारी कर कहा कि विवाह समारोहों में गाने बजाने पर कॉपीराइट अधिनियम 1957 की धारा 52 (1) (za) के तहत केस दर्ज किए जाने की कई शिकायतें मिली हैं। अधिनियम की धारा 52 में कुछ ऐसे काम बताए गए हैं जिनमें कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। धारा 52 (1) (जेडए) में विशेष रूप से किसी धार्मिक समारोह या आधिकारिक समारोह के दौरान फिल्मी गाने बजाए जाते हैं तो उसे कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं माना गया है।
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सरकार के फैसले से आम लोगों को मिलेगी राहत
नोटिस में बताया गया है कि धार्मिक समारोहों में विवाह और विवाह से जुड़े अन्य सामाजिक उत्सव शामिल हैं। इसे देखते हुए कॉपीराइट सोसायटी को किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अधिनियम की धारा 52 (1) (जेडए) के उल्लंघन वाले काम प्रवेश करने से सख्ती से परहेज करने का निर्देश दिया जाता है। सरकार के इस फैसले से आम लोगों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही हॉस्पिटलिटी सेक्टर ने भी इसका स्वागत किया है। अब उन्हें विभिन्न कॉपीराइट संगठनों के दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। कॉपीराइट सोसायटी द्वारा कॉपीराइट के उल्लंघन की शिकायतें किए जाने से हॉस्पिटलिटी सेक्टर में डर था। केंद्र सरकार के फैसले से यह डर खत्म हो गया है।
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