
Chabahar Port Deal: भारत और ईरान के बीच हाल ही में चाबहार बंदरगाह को लेकर 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत भारत अगले 10 सालों तक ईरानी बंदरगाह को ऑपरेट करेगा। ये भारत को ईस्ट एशिया तक बिजनेस के क्षेत्र में पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इस डील के बाद अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ व्यापारिक सौदे करने वाले किसी भी देश को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद मंगलवार (14 मई) को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका को दो टूक में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह से पूरे क्षेत्र को लाभ होगा और इसके बारे में छोटी सोच नहीं रखनी चाहिए। अमेरिका भी पहले चाबहार पोर्ट को लेकर सरहाना कर चुका है।
एस जयशंकर ने अपने बयान में कहा कि हमारा चाबहार बंदरगाह के साथ एक लंबा जुड़ाव था, लेकिन हम कभी भी लंबे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर सके थे। इसकी वजह ये थी कि इसमें कई तरह की प्रॉब्लम थी। आखिरकार हम इसे सुलझाने में सफल हो गए और एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर करने में कामयाब हुए। हम बिना किसी दीर्घकालिक समझौते के बंदरगाह का संचालन नहीं सकते थे, लेकिन अब हम ऐसा कर सकते हैं।
कहां स्थित है चाबहार बंदरगाह?
चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। इसे भारत ने साल 2003 में डेवलप करने का प्रस्ताव रखा था। ये भारतीय सामानों को अफगानिस्तान और मध्य तक पहुंचने के लिए एक प्रवेश द्वार प्रदान करेगा। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा था कि हम अवगत हैं कि ईरान और भारत ने चाबहार बंदरगाह के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मैं भारत सरकार को चाबहार बंदरगाह के साथ-साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों के संबंध में अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों के बारे में बात करने दूंगा।
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