
Chalo Lakshadweep tourism call: लक्षद्वीप टूरिज्म को लेकर मालदीव और भारत के बीच बढ़े तनाव के बीच देशभर में सोशल मीडिया पर चलो लक्षद्वीप अभियान शुरू हो गया है। हालांकि, बेहद कम सुविधाओं की वजह से टूरिस्टों की आमद अभी भी यह क्षेत्र बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैज़ल ने उन वजहों की ओर ध्यान दिलाया है जिसकी वजह से अभी लक्षद्वीप में टूरिज्म को और अधिक प्रमोट किया जाना सही फैसला नहीं है।
सांसद मोहम्मद फैज़ल ने बताया कि लक्षद्वीप के लिए केवल एक सीधी उड़ान है। यहां होटलों की संख्या में करीब डेढ़ सौ के आसपास है जिनके पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में टूरिज्म के लिए चलो लक्षद्वीप अभियान अभी जमीन पर सही तरीके से नहीं उतर सकेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को नियंत्रित करना होगा क्योंकि यहां के नाजुक इको सिस्टम से स्थितियां बेहाल हो जाएंगी। फैज़ल ने कहा कि लक्षद्वीप, मूंगे से बना है, बहुत संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से बहुत नाजुक है।
एकीकृत द्वीप प्रबंधन योजना
सांसद मोहम्मद फैज़ल ने कहा कि नाजुक इकोसिस्टम की वजह से सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस रवींद्रन आयोग ने एकीकृत द्वीप प्रबंधन योजना की सलाह दी। यह सलाह, यहां के विकास के लिए बाइबिल है। सड़कों, घाटों या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चरल प्रोजेक्ट्स को शुरू करने के पहले आयोग की सलाह ली जाती है। उन्होंने कहा, आयोग की यह व्यापक रूप से स्वीकृत योजना द्वीपों की वहन क्षमता और उनमें आने वाले पर्यटकों की संख्या का भी सुझाव देती है।
36 द्वीपों का समूह है लक्षद्वीप
लक्षद्वीप, एक 36 द्वीपों का समूह है। लेकिन केवल दस पर ही लोग रहते हैं। हालांकि, लक्षद्वीप की महज 8-10 प्रतिशत आबादी ही पर्यटन पर निर्भर है। हालांकि, लक्षद्वीप में पीएम मोदी के विजिट और मालदीव के मंत्रियों की उन पर टिप्पणी के बाद यहां पर्यटन को लेकर सर्च और सोशल मीडिया ट्रेंडिंग शुरू हो गई।
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