यहां कुत्ते से कराई जाती है बच्चे की शादी, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

Published : Mar 02, 2025, 10:17 PM IST
dog marriage with kid

सार

Marriage With Dog: ओडिशा के संथाल आदिवासियों में बच्चों के ऊपरी दांत पहले निकलने पर कुत्ते से शादी कराने की अनोखी परंपरा है। 

Marriage With Dog: जब किसी परिवार में बच्चे का पहला दांत निकलता है, तो यह माता-पिता के लिए बेहद खुशी का पल होता है। लेकिन ओडिशा के संताल आदिवासियों के लिए यह क्षण खुशी से ज्यादा चिंता लेकर आता है। इस समुदाय में मान्यता है कि अगर किसी संताल बच्चे के ऊपरी दांत पहले निकल आएं, तो यह अशुभ संकेत होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे बच्चे के जीवन में मृत्युदोष लग सकता है और उसका जीवन संकट में पड़ सकता है।

इस जाती के लोग आज भी निभाते है ये परंपरा

ओडिशा के मयूरभंज जिले से आकर बसे संथाल आदिवासी वर्षों से एक अनोखी परंपरा को निभाते आ रहे हैं। इस परंपरा के तहत, यदि किसी बच्चे के ऊपरी दांत पहले निकल आते हैं, तो इसे अशुभ माना जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए समुदाय में एक अनूठा अनुष्ठान किया जाता है, जिसमें बच्चे की शादी एक कुत्ते से कराई जाती है।

पांच साल तक पूरा कर लिया जाता है ये संस्कार

आमतौर पर यह संस्कार अधिकतम पांच साल की उम्र तक पूरा कर लिया जाता है। यदि यह दोष किसी लड़के में पाया जाता है, तो उसकी शादी मादा कुत्ते से और यदि किसी लड़की में यह दोष हो, तो उसकी शादी नर पिल्ले से कराई जाती है। इस विवाह समारोह को पूरी विधि-विधान और धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें बैंड-बाजा, बारात और पारंपरिक नाच-गाना भी शामिल होता है।

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गांव से दूर छोड़ दिया जाता था

संथाल समुदाय की मान्यता के अनुसार, 'सेता बपला' या 'दैहा बपला' नामक इस अनुष्ठान के बाद बच्चे के जीवन का संकट समाप्त हो जाता है क्योंकि यह दोष कुत्ते या एक विशेष पेड़ में स्थानांतरित हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद कुत्ते या उस पेड़ को गांव से दूर छोड़ दिया जाता है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इस मान्यता को महज अंधविश्वास मानते हैं। डॉक्टर के अनुसार छोटे बच्चों में दांत निकलना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक है कि किसी बच्चे के पहले ऊपरी दांत आएं या निचले हिस्से में।

आज के आधुनिक समय में जहां विज्ञान और शिक्षा का प्रसार बढ़ा हैं। कुछ स्थानों पर अब भी यह परंपरा निभाई जा रही है। जहां कुछ लोग इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं, वहीं कई लोग इसे अंधविश्वास मानकर समाप्त करने की वकालत कर रहे हैं।

 

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