
नई दिल्ली. एसपीजी के बाद संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट में मंजूरी मिल गई। अगले हफ्ते सदन में पेश किए जाने की संभावना है। इस बिल में पड़ोसी मुल्कों से शरण के लिए आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
राजनाथ सिंह ने कहा, सदन में रहें सभी सांसद
- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भाजपा सांसदों से कहा कि जब गृह मंत्री अमित शाह नागरिकता संशोधन विधेयक पेश करें तब वे बड़ी संख्या में उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि संसद में पार्टी सांसदों के अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लिया जाएगा।
- इससे पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि भाजपा इस बिल को पेश करने का सपना देख सकती है, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों का समान अधिकार है। इस विधेयक से लोगों के बीच एक अस्थिरता पैदा होगी।
क्या है नागरिकता संशोंधन बिल?
- विधेयक के तहत 1955 के सिटिजनशिप एक्ट में बदलाव किया जाएगा।
- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत में बसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव।
- इन समुदायों के उन लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जो बीते एक साल से लेकर 6 साल तक में भारत आकर बसे हैं।
- अभी भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए यह समय सीमा 11 साल की है।
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