Meghalaya Violence News: क्या मेघालय में चुनावी राजनीति ने फिर भड़का दिया जातीय टकराव? वेस्ट गारो हिल्स में GHADC चुनाव के नॉमिनेशन को लेकर आदिवासी-गैर आदिवासी संघर्ष हिंसा में बदल गया। पुलिस फायरिंग में 2 मौतें, कर्फ्यू लागू और आर्मी फ्लैग मार्च-क्या बढ़ेगा मेघालय चुनाव तनाव?
Meghalaya Tribal vs Non Tribal Conflict: मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले में लोकल काउंसिल चुनावों को लेकर हालात अचानक बिगड़ गए। आदिवासी और गैर-आदिवासी समूहों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। स्थिति गंभीर होते देख प्रशासन ने पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आर्मी को फ्लैग मार्च के लिए बुलाया गया। यह घटना गारो हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (GHADC) के चुनाव के लिए चल रही नॉमिनेशन प्रक्रिया के दौरान हुई। इस चुनाव को लेकर पिछले कुछ दिनों से इलाके में तनाव बना हुआ था।

GHADC चुनाव को लेकर अचानक क्यों भड़क गई हिंसा?
जानकारी के मुताबिक, यह घटना चिबिनांग इलाके में हुई। जब GHADC चुनाव के लिए उम्मीदवार नॉमिनेशन दाखिल कर रहे थे, उसी दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासी समूहों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस ने बताया कि हालात को काबू में करने के लिए जब गैर-कानूनी भीड़ को हटाया जा रहा था, तब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई। मृतक दोनों लोग चिबिनांग इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

गैर-आदिवासी उम्मीदवारों को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों?
दरअसल, प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि गैर-आदिवासी लोग GHADC चुनाव में हिस्सा न लें और चुनाव न लड़ें। इसी मुद्दे को लेकर पिछले कुछ दिनों से इलाके में तनाव बढ़ता जा रहा था। 17 फरवरी को GHADC की एग्जीक्यूटिव कमेटी ने एक प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को वैध अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र दिखाना जरूरी होगा। इसी फैसले के बाद विवाद और बढ़ गया।

पूर्व विधायक पर हमला कैसे बना हिंसा की बड़ी वजह?
बताया जा रहा है कि यह विवाद तब और बढ़ गया जब फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर हमला कर दिया। मोमिन तुरा में डिप्टी कमिश्नर ऑफिस पहुंचे थे, जहां वे GHADC चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन दाखिल करने वाले थे। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया और देखते-देखते हालात हिंसा में बदल गए।

हालात काबू करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 24 घंटे का कर्फ्यू लागू कर दिया। इसके साथ ही अफवाहों को रोकने के लिए 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई। हालात को देखते हुए सिविल प्रशासन ने सेना से मदद मांगी। इसके बाद इलाके में आर्मी की टुकड़ियां तैनात की गईं और फ्लैग मार्च शुरू किया गया। सेना का उद्देश्य लोगों में भरोसा कायम करना और किसी भी नई हिंसा को रोकना है।

मेघालय हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले पर मेघालय हाई कोर्ट ने भी चिंता जताई है। कोर्ट में राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया कि नॉमिनेशन प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की है।

क्या चुनाव से पहले फिर बढ़ सकता है तनाव?
GHADC चुनाव के लिए नॉमिनेशन 16 मार्च तक दाखिल किए जाएंगे, जबकि स्क्रूटनी 17 मार्च को होगी। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि चुनाव से पहले इलाके में शांति बनाए रखी जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि मेघालय में आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों के बीच संसाधनों, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है, जो चुनाव के दौरान अक्सर सामने आ जाता है। फिलहाल प्रशासन, सेना और स्थानीय अधिकारियों की कोशिश है कि हालात जल्द सामान्य हो जाएं और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें।


