
नई दिल्ली. संसद में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पेश हो सकता है। इस बिल को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) के पारित होने का मतलब महात्मा गांधी के विचारों पर मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जीत होगा। उन्होंने कहा, "धर्म के आधार पर नागरिकता देने से भारत का स्तर गिरकर पाकिस्तान का हिन्दुत्व संस्करण हो जाएगा। विधेयक का पारित होना महात्मा गांधी के विचारों पर मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जीत होगी।"
बिल का पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध : इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं और काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है।
क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक : नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था। पिछली लोकसभा के भंग होने के बाद विधेयक की मियाद भी खत्म हो गयी।
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