सिक्योरिटी, इनको बाहर करो...NEET की सुनवाई के वक्त चीफ जस्टिस का आदेश

Published : Jul 23, 2024, 04:26 PM ISTUpdated : Jul 24, 2024, 03:06 PM IST
Justice DY Chandrachud

सार

सुप्रीम कोर्ट में नीट परीक्षा गड़बड़ियों की चल रही सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चद्रचूड़ एक वकील पर भड़क गए। खुद को न्याय मित्र बताने वाले अधिवक्ता को बाहर निकालने तक का आदेश सीजेआई ने दे दिया।

Supreme Court news: सुप्रीम कोर्ट में नीट परीक्षा में गड़बड़ियों और अनियमितताओं की सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ एक वकील पर भड़क उठे। कोर्ट की सुनवाई में बाधा डालने की कोशिश कर रहे वकील को फटकारते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा- सिक्योरिटी बुलाओ, इनको हटाओ।

दरअसल, हुआ यह मामलों की सुनवाई के दौरान जिरह कर रहे एक वकील को टोंकते हुए दूसरे वकील वकील मैथ्यूज नेदुम्परा ने कुछ बोलना चाहा। इस पर बेंच ने नेदुम्परा को रोका। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं सभी वकीलों में सबसे सीनियर हूं। मैं जवाब दे सकता हूं।

सीजेआई और वकील के बीच हुई गरमागरम बहस

नेदुम्परा के जवाब पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा: मैंने यहां पर कोई न्यायमित्र नियुक्त नहीं किया है।

नेदुम्परा बोले: अगर आप मेरा सम्मान नहीं करते हैं तो मैं चला जाऊंगा।

जवाब सुनकर सीजेआई ने उनको चेतावनी दी। उन्होंने कहा- आप गैलरी में बात नहीं करेंगे। मैं कोर्ट का इंचार्ज हूं। सीजेआई ने कहा: सिक्योरिटी बुलाओ, इनको बाहर करो। इस पर वकील ने जवाब दिया- मैं जा रहा हूं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा- आपको ऐसा कहने की ज़रूरत नहीं है, आप जा सकते हैं। मैंने पिछले 24 सालों से न्यायपालिका देखी है। मैं वकीलों को इस अदालत में प्रक्रिया तय करने नहीं दे सकता।

सीजेआई के इतना कहने पर भी वकील शांत नहीं हुए। फिर वह बोल पड़े। उन्होंने कहा कि मैंने इसे 1979 से देखा है और वह कोर्ट से निकल गए।

पहले भी सीजेआई वकील नेदुम्परा को लगा चुके हैं फटकार

दरअसल, यह पहली बार नहीं है कि वकील मैथ्यूज नेदुम्परा को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की फटकार मिली हो। इस साल मार्च में इलेक्टोरल बॉन्ड मामले की सुनवाई के दौरान नेदुम्परा को बीच में बातचीत करने से मुख्य न्यायाधीश ने रोका था। सीजेआई ने कहा था कि मुझ पर चिल्लाओ मत। यह हाइड पार्क की मीटिंग नहीं है, आप अदालत में हो। आप आवेदन देना चाहते हो, आवेदन दाखिल करो। आपको मुख्य न्यायाधीश के रूप में मेरा निर्णय मिल गया है, हम आपकी बात नहीं सुन रहे हैं। यदि आप आवेदन देना चाहते हैं तो ईमेल करें। इस अदालत में यही नियम है।

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