
नई दिल्ली. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने अपनी विदाई पर संबोधित किया। उन्होंने कहा, मैं कभी पाकिस्तान नहीं गया और मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली हूं। मुझे लगता है कि हर मुसलमान को गर्व महसूस होना चाहिए कि हम भारत में हैं। उन्होंने अटल जी को याद करते हुए कहा, सदन का सबसे आसान काम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान हुआ था। अटल जी से मैंने बहुत कुछ सीखा, कैसे गतिरोध को खत्म किया, कैसे सदन को चलाया जाता है।
वह घटना जिसे याद कर मोदी के बाद गुलाम नबी भी रो पड़े
अपने विदाई भाषण में गुलाम नबी आजाद भी तब भावुक हो गए। जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और 2005 की उस घटना का उल्लेख किया, जिसका प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया था। उन्होंने कहा, मैं अपने जीवन में रोया, जब संजय गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की मृत्यु हो गई, क्योंकि यह सब अचानक हुआ। फिर मैं ओडिशा में चक्रवात के दौरान रोया, जब मुझे वहां जाने के लिए कहा गया और तब मेरे पिता कैंसर से पीड़ित थे। पांचवीं बार मैं 2005 में रोया था जब दर्जनों गुजरात यत्रियों की एक आतंकी हमले में मृत्यु हो गई थी। गुलाम नबी आजाद ने कहा, मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि देश से उग्रवाद खत्म हो।
"मैं भाग्यशाली हो, जो कभी पाकिस्तान नहीं गया"
उन्होंने कहा, मैं उन सौभाग्यशाली लोगों में से हूं, जो कभी पाकिस्तान नहीं गए। जब मैं पाकिस्तान में परिस्थितियों के बारे में पढ़ता हूं, तो मुझे हिंदुस्तानी मुसलमान होने पर गर्व महसूस होता है।
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