
Congress Rebels return: एनडीए के नेतृत्व में तीसरी बार नरेंद्र मोदी सरकार बनाने जा रहे हैं। हालांकि, पिछले दो चुनावों की अपेक्षा इस बार बीजेपी को अकेले अपने दम पर बहुमत नहीं मिली है। इंडिया गठबंधन दलों ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है और वह 99 सांसदों के साथ दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में लोकसभा में पहुंची है। हालांकि, कांग्रेस का यह आंकड़ा 101 तक पहुंचने वाला है क्योंकि उसके दो बागी नेता चुनाव जीतकर एक बार फिर कांग्रेस के पाले में पहुंच चुके हैं। पूर्णिया से सांसद चुने गए पप्पू यादव ने पहले ही कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था जताई थी तो महाराष्ट्र के सांगली से निर्दलीय जीते विशाल दादा पाटिल भी चुनाव बीतते ही वापसी का संकेत दे दिए हैं।
विशाल दादा पाटिल ने सोनिया-राहुल और खड़गे से मुलाकात कर दिया समर्थन
सांगली लोकसभा सीट से कांग्रेस से बगावत करके विशाल प्रकाशबापू पाटिल ने चुनाव जीता है। कांग्रेस में विशाल प्रकाशबापू पाटिल का मुखर समर्थन करने वाले और बगावत के दौरान भी उनके लिए पार्टी में उनको जायज ठहराने वाले विधायक विश्वजीत कदम ने कहा कि विशाल दादा पाटिल कांग्रेस के साथ आएंगे तो लोकसभा में ताकत हमारी 100 हो जाएगी। विशाल पाटिल और विश्वजीत कदम ने गुरुवार को मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की। उन्होंने अपना समर्थन कांग्रेस को देने का ऐलान किया।
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी निर्दलीय सांसद विशाल दादा पाटिल का स्वागत किया। खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "सांगली से निर्वाचित सांसद विशाल पाटिल के कांग्रेस पार्टी में समर्थन का स्वागत करते हैं।"
कौन हैं विशाल दादा पाटिल?
सांगली से निर्दलीय सांसद विशाल दादा पाटिल, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल के पोते हैं। विशाल पाटिल ने भाजपा के संजयकाका पाटिल को हराकर सांगली सीट से लोकसभा चुनाव जीता है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे में सांगली संसदीय सीट शिवसेना-यूबीटी को दिए जाने के बाद उन्होंने बगावत कर दी थी। इसके बाद निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था।
पप्पू यादव ने भी कांग्रेस में होने का किया दावा
बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव भी सांसद के रूप में कांग्रेस के साथ खड़े होने का ऐलान किया है। पप्पू यादव, लोकसभा चुनाव के पहले अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। वह बिहार की पूर्णिया संसदीय क्षेत्र से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस ने उनको पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र से लड़ाने का मन बनाया था लेकिन ऐन वक्त पर यह सीट गठबंधन में चली गई। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व ने कई बार पप्पू यादव के लिए पूर्णिया सीट छोड़ने की अपील की थी लेकिनि बात नहीं बनी। उधर, टिकट नहीं मिलने पर पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया। निर्दलीय चुनाव जीतकर सांसद बनने वाले पप्पू यादव भी कांग्रेस के साथ चले गए हैं। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन की नेता हैं और उनको कांग्रेस ने राज्यसभा में भेजा है।
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