
नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से देश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। चाहे सरकारी हों या प्राइवेट, सभी के इंतजाम फेल साबित हुए हैं। इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। ऑक्सीजन संकट पर हाईकोर्ट से मिले नोटिस के खिलाफ केंद्र सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को इस मामले पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दो टूक कहा कि नाकाम अफसरों का जेल में डालें या अवमानना के लिए तैयार रहें। इस मामले में 10 मई को फिर सुनवाई होगी। साथ ही राज्यों ने क्या किया, इसे भी सुप्रीम कोर्ट देखेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा
केंद्र ने जब बताया कि दिल्ली की मांग अधिक है, उसके मुताबिक संसाधन कम हैं। इस पर जस्टिस शाह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक राष्ट्रीय आपदा है। ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे हैं। सही है कि केंद्र अपनी ओर से कोशिश कर रही है, लेकिन अभी शॉर्टेज है। इसलिए उसे अपना प्लान हमें बताना चाहिए।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने केंद्र से सवाल किया कि आपने दिल्ली को कितनी ऑक्सीजन दी? वहीं, यह हाईकोर्ट में यह कैसे बोल दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली को 700 एमटी ऑक्सीजन सप्लाई का आदेश दिया है। इस पर केंद्र ने जवाब दिया कि अप्रैल से पहले ऑक्सीजन की डिमांड अधिक नहीं थी, लेकिन अब काफी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि केंद्र की जिम्मेदारी है कि वो आदेश का पालन करे। जो अफसर काम नहीं कर पा रहे, उन्हें जेल में डाले या फिर खुद अवमानना के लिए तैयार रहे। लेकिन इससे दिल्ली को ऑक्सीजन को नहीं मिलेगा। ऑक्सीजन काम करने से ही मिलेगी।
आप सिर्फ एक तरह से हिसाब नहीं लगा सकते
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र का पूरा फॉर्मूला सिर्फ अनुमान पर है। हर राज्य की स्थिति अलग है। हर जिले के हालात अलग हो सकते हैं। राज्यों में अलग-अलग समय पर कोरोना का पीक आ रहा है। इसलिए सिर्फ एक तरह से अनुमान नहीं लगा सकते। दिल्ली के हालात खराब हैं। आपको बताना होगा कि इस दिशा में 3 से 5 मई तक आपने क्या कदम उठाए। इस पर केंद्र ने कहा कि उसने 3 मई को 433 एमटी और 4 मई को 585 एमटी ऑक्सीजन दिल्ली को दी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र को सुबह-शाम और दोपहर तीनों वक्त का डेटा उपलब्ध कराना चाहिए। इसके लिए वर्चुअल कंट्रोल रूम का प्रयोग होना चाहिए, जिससे पता चले कि किस अस्पताल को कितनी ऑक्सीजन मिल रही है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुझाव दिया कि इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो वैज्ञानिक आधार पर ऑक्सीजन का वितरण करा सके।
दिल्ली को नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोनाकाल में बीएमसी की तारीफ करते हुए दिल्ली सरकार को नसीहत दी कि उसे कुछ सीखना चाहिए। उसे अपने काम पर फोकस करना चाहिए। इससे किसी भी अधिकारी पर कोर्ट की अवमानना का केस नहीं होगा। दिल्ली सरकार को भी हर सोमवार को बताना होगा कि 700 एमटी ऑक्सीजन के टारगेट के लिए क्या किया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वे जज के अलावा एक नागरिक भी हैं, लोगों की मदद की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वे असहाय हैं। जब वे ऐसा महसूस कर रहे, तो सोचिए लोगों का क्या हाल होगा।
यह है पूरा मामला
दरअसल, दिल्ली सरकार का तर्क था कि उसे आवंटित कोटे से कम ऑक्सीजन दी जा ही है। इसी मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया था। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है और बुधवार को इस पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने केंद्र के दो अफसरों को नोटिस भेजा था, इस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी। केंद्र इस मामले में जल्द सुनवाई चाहता था, इसलिए चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने मामला जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच को सौंपा था। जजों की कमी के कारण ऐसा करना पड़ा।
यह भी जानें..
देश में कोरोना संक्रमण की स्पीड अब ऊपर-नीचे हो रही है। दो दिन पहले मामलों में मामूली कमी आई थी, लेकिन पिछले 24 घंटे में आंकड़े फिर जम्प ले गए। 4 मई को 3.,55 लाख केस मिले थे, जो 5 मई को बढ़कर 3.82 लाख हो गए हैं। वहीं मौतें भी बढ़कर 3,783 हो गई हैं। अप्रैल के मध्य ये रोज 3000 से अधिक मौतें हो रही हैं। हालांकि यह अच्छी बात है कि कई राज्यों में रिकवरी रेट बेहतर हुई है। पिछले 24 घंटे में ही 3.37 लोग ठीक हुए। देश में अब तक 2 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 1,69,38,400 लोग रिकवर हो चुके हैं। इस समय देश में 34,84,824 से अधिक लोग अपना इलाज करा रहे हैं।
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