
नई दिल्ली. पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है। अब तक दुनियाभर में 3.9 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना से निपटने के लिए तमाम देश और कंपनियां कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2 अक्टूबर के ड्राफ्ट के मुताबिक, कुल 193 कंपनियां वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। वहीं, चीन और रूस ने तो वैक्सीन बनाने का दावा भी कर दिया है। हालांकि, इन वैक्सीन पर पश्चिमी देश भरोसा नहीं जता पाए हैं। आईए जानते हैं कि दुनियाभर में कितनी वैक्सीन बन रही हैं, इनमें से सबसे पहले कौन सी वैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है।
WHO के मुताबिक, कुल 193 कंपनियां वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। जबकि इनमें से 42 क्लीनिकल ट्रायल में हैं। इनमें से 10 वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में हैं। इन वैक्सीन की टेस्टिंग बड़े पैमाने पर लोगों पर की जा रही है। माना जा रहा है कि इन्हें पब्लिक इस्तेमाल की भी मंजूरी मिल सकती है।
ये वैक्सीन तीसरे चरण में
ऑक्सफोर्ड, मोडर्ना, पी फिजर, जॉनसन एंड जॉनसन, गैमेलेया ऐसी वैक्सीन हैं, जो ट्रायल के आखिरी चरण में हैं। जबकि रूस ने अगस्त में ही दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने का दावा किया था। हालांकि, WHO ने इस दावे पर भरोसा नहीं दिखाया।
| वैक्सीन | किस फेज में कौन सी वैक्सीन | |
| 1- | ऑक्सफोर्ड | फेज-III |
| 2- | सिनोवेक | फेज-III |
| 3- | सिनोफॉर्म-वुहान इंस्टीट्यूट | फेज-III |
| 4- | मोडर्ना | फेज-III |
| 5- | पी-फिजर बायोटेक | फेज-III |
| 6- | केनसिनोल-बीजिंग | फेज- III |
| 7- | सिनोफॉर्म- बीजिंग इंस्टीट्यूट | फेज- III |
| 8- | गैमेलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट | फेज- III |
| 9- | नोवावैक्स | फेज- III |
| 10- | जॉनसन एंड जॉनसन | फेज- III |
कब मिलेगी वैक्सीन?
पूरी दुनिया इस साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद लगाए बैठी है। हालांकि, WHO ने हाल ही में कहा कि 2021 के आखिर तक एक असरदार वैक्सीन आ सकती है, लेकिन यह सीमित मात्रा में होगी। सबसे पहले इसे स्वास्थ्य कर्मियों और गंभीर खतरे वाले लोगों को दिया जाएगा। युवाओं और स्वस्थ लोगों को 2022 तक वैक्सीन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
भारत की क्या है तैयारी?
भारत में बन रही बायोटेक और जायडस कैडिला वैक्सीन अभी दूसरे चरण में हैं। जबकि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन का भारत में तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इस वैक्सीन को बनाने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से समझौता किया गया है। माना जा रहा है कि इसे 2021 के शुरू होने से पहले मंजूरी मिल सकती है। यह पहली वैक्सीन भी हो सकती है।
भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने हाल ही में बताया था कि देश अगले 6 महीने में लोगों को कोरोना का टीका उपलब्ध कराने की स्थिति में होगा। उन्होंने कुछ ही महीनों में देश में कोरोना का टीका उपलब्ध होने की भी बात कही थी।
अप्रूवल के बाद सामने होंगी ये चुनौतियां
वैक्सीन बनाने के दौरान कई नैतिक चुनौतियां और वित्तीय चुनौतियां दाव पर हैं। भारी निवेश और वैश्विक सहयोग से देशों को उम्मीद है कि जल्द ही वैक्सीन बन जाएगी। वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए, देश सामान्य तौर पर नियमों को दरकिनार कर रहे हैं और कोरोना महामारी को देखते हुए जल्द अप्रूवल भी दे रहे हैं। हालांकि, वैक्सीन का विकास कोरोना के खिलाफ जंग में पहला कदम होगा। एक बार किसी देश से वैक्सीन को अनुमति मिल जाती है तो बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण करने की जरूरत होगी।
देशों को वैक्सीन के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है, क्योंकि पूरी दुनिया की आबादी के लिए वैक्सीन के उत्पादन में काफी समय लगेगा। इसके अलावा फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स और गंभीर जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन देने में प्राथमिकता देनी होगी। वहीं, अमीर देश वैक्सीन निर्माताओं से बड़ी मात्रा में वैक्सीन खरीद सकते हैं। इससे गरीब देशों के लिए समस्याएं पैदा होंगी।
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