
नई दिल्ली. भारत कोरोना वायरस के खिलाफ लगातार जंग छेड़े हुए है। इस जंग में सबसे अहम दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी भारत में चल रहा है। इसके तहत भारत में अब तक 15 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। 16 जनवरी को भारत में वैक्सीनेशन शुरू हुआ था। अब तक 103 दिन में देश में करीब 14,98,77,121 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। इतना ही नहीं पिछले 24 घंटे में 20 लाख से ज्यादा डोज लगाई गई हैं।
वैक्सीनेशन में भारत अमेरिका चीन से आगे
भारत में वैक्सीनेशन काफी तेजी से हो रहा है। हालांकि, अमेरिका और चीन में वैक्सीनेशन काफी पहले शुरू हो गया था। ऐसे में वहां डोज ज्यादा लगाई जा चुकी हैं।
| देश | 14 करोड़ डोज | 13 करोड़ डोज | 12 करोड़ डोज |
| भारत | 99 | 95 | 92 |
| अमेरिका | 104 | 101 | 97 |
| चीन | 112 | 109 | 108 |
किस देश में कितनी डोज लगीं
| देश | डोज |
| चीन | 23.6 करोड़ |
| अमेरिका | 23.2 करोड़ |
| भारत | 14.9 करोड़ |
| ब्रिटेन | 4.7 करोड़ |
| ब्राजील | 4.02 करोड़ |
किसको कितनी वैक्सीन लगी
भारत में 93,66,239 स्वास्थ्य कर्मियों यानी हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। जबकि 61,45,854 स्वास्थ्य कर्मियों ने दूसरी खुराक ली है। वहीं, 1,23,09,507 फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है जबकि 65,99,492 फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीके की दूसरी खुराक दी गई है।
45 साल से लेकर 60 साल के उम्र के 5,09,75,753 लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है। जबकि 31,42,239 लोगों को दूसरी खुराक दी गई है। वहीं, 60 साल से ऊपर के 5,14,70,903 लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। जबकि 98,67,134 लोगों को टीके की दूसरी खुराक लगाई जा चुकी है।
1 मई से 18 के ऊपर के लोगों को लगेगी वैक्सीन
भारत में 16 जनवरी को वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू किया गया था। पहले चरण में हेल्थ वर्कर्स और फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी गई। वहीं, दूसरा चरण 1 मार्च को शुरू हुआ। इसमें 60 साल से ऊपर और 45 साल से अधिक उम्र के बीमार लोगों को वैक्सीनेशन कराया गया था। अभी 45 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगवाई जा रही है।
1 मई से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन दी जानी है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गए हैं।
भारत में दो वैक्सीनों का हो रहा इस्तेमाल, स्पुतनिक वी को मिली मंजूरी
भारत में अभी कोरोना की कोविशील्ड और कोवैक्सिन वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। कोविशील्ड ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन है, इसे भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है। जबकि कोवैक्सिन को भारत बायोटेक ने बनाया है। वहीं, अप्रैल में रूस की वैक्सीन स्पुतनिक वी को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इसके मई के आखिरी तक भारत में आने की उम्मीद है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, कल कोविन प्लैटफॉर्म को शुरू करने के 3 घंटे के अंदर 88 लाख नौजवान वैक्सीनेशन के लिए बुक कर चुके थे। जिस तेजी से लोग वायरस की चपेट में आ रहे हैं उतनी ही तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। हमारी मृत्यु दर शायद दुनिया में सबसे कम 1.11% है।
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