
मुंबई. चक्रवाती तूफान तौकते महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात से लेकर कर्नाटक तबाही मचा रहा है। हालांकि, अब यह कमजोर हो गया है। वहीं, नेवी और कोस्ट गार्ड चक्रवाती तूफान तौकते के चलते समुद्र में फंसे लोगों को बचाने में लगे हैं। दरअसल, समुद्र में चार जहाज फंस गए थे। इनमें 700 लोग सवार थे। 24 घंटे से ज्यादा समय से जारी रेस्क्यू अभियान में नेवी और तटरक्षक बल के जवानों ने 638 लोगों को बचा लिया है। 14 शव अभी तक मिले हैं। बाकी लोगों की अभी भी तलाश की जा रही है।
जानिए कहां फंसे थे जहाज और कितने लोग बचाए गए?
समुद्र में बार्ज P305, सागर भूषण , बार्ज एस एस 3 और बार्ज गल कन्ट्रेक्टर नाम के चार जहाज फंसे थे।
पहला जहाज: मुंबई से 175 किलोमीटर दूर हीरा ऑयल फील्ड्स के पास भारतीय जहाज P-305 समुद्र में डूब गया था। इसमें 273 लोग सवार थे। इनमें से 184 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। INS कोच्चि और कोलकाता से लोगों को बचाकर मुंबई लाया जा रहा है। वहीं, आईएनएस तेग, आईएनएस बेतवा, आईएनएस ब्यास और पी81 एयरक्रॉप्ट अभी भी रेस्क्यू में लगा है।
दूसरी नाव में फंसे थे 137 लोग
दूसरी नाव मुंबई से 8 समुद्री मील दूर फंसी थी। इसमें 137 लोग बताए जा रहे हैं। इसमें से सभी 137 लोगों को बचा लिया गया है। इस नाव से GAL कंस्ट्रक्टर से भी इमरजेंसी मैसेज मिला था। इसके बाद इस नाव में सवार लोगों को बचाने के लिए आईएनएस कोलकाता लगाया गया था। यह नाव कोलाबा में फंसी था।
सागर भूषण- इस पर 101 लोग फंसे हुए थे। ये जहाज पिवाव पोर्ट से 50 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में फंसा था। रेस्क्यू के लिए नेवी ने INS तलवार को लगाया था। सभी लोगों को नेवी और कोस्टगार्ड ने सुरक्षित निकाल लिया है।
बार्ज SS-3- इस जहाज पर 196 लोग फंसे हुए थे। बताया जा रहा है कि यह जहाज भी सागर भूषण के पास पिवाव पोर्ट से 50 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में फंसा था। नेवी ने इस पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।
कैसे हुआ रेस्क्यू ?
नेवी के एक अफसर ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती ये थी, कि हमें दूसरों की जिंदगी भी बचानी थी और अपनी जान भी। वहीं, पी-305 डूब गया था, जबकि दूसरा गॉल कन्सट्रक्टर फंसा था। नेवी, कोस्ट गार्ड, ओएनजीसी द्वारा चलाए गए ऑपरेशन के हेड नवल कमांड के ऑपरेशन कमांडर कमोडोर एमके झा ने मीडिया से बाचतीत में कहा कि तूफान की आंख मुंबई के ठीक पश्चिम में थी, हमने इसकी चिंता किए बगैर तेजी से ऑपरेशन शुरू किया।
उन्होंने बताया कि लहरें 23 फीट तक ऊपर उठ रही थीं। वहीं, हवा भी 100-120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। इसके अलावा बारिश भी काफी तेज थी। स्थिति ये थी कि हम एक किमी दूर तक भी नहीं देख पा रहे थे।
लोगों को कैसे बचाया गया?
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीमों ने पहले फंसे जहाजों की पॉजिशन पता की और कुछ वक्त तक मॉनिटर किया। वहीं, P-305 के डूबने की जगह पता की। इसके बाद ऑपरेशन शुरू किया गया। हालांकि, बारिश और तेज हवा के चलते हेलिकॉप्टर ऑपरेशन नहीं कर पा रहे थे वे सिर्फ मॉनिटरिंग में लगे थे।
वहीं, जहाज डूबने से पहले P-305 पर सवार सभी लोग लाइफ जैकेट पहनकर समुद्र में कूंद गए थे। उन्होंने समुद्र में ही तूफान को घंटों तक झेला। जब तक उनके पास तक मदद नहीं पहुंची। इसके बाद नेवी की टीमों ने सभी जहाजों तक पहुंचकर लोगों का रेस्क्यू करना शुरू किया।
चार दशक में सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान था- नौसेना
डिप्टी चीफ ऑफ नेवी स्टाफ मुरलीधर सदाशिव पवार ने बताया कि पिछले 4 दशक में उनके द्वारा देखा गया, सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान था। सबसे ज्यादा मुश्किल पी 305 पर फंसे लोगों को रेस्क्यू करने में हुई। इसके लिए चार आईएनएस तैनात किए गए थे।
कोरोना की नहीं की फिक्र
उन्होंने बताया कि कोरोना हो या नहीं, हमारा उद्देश्य लोगों को बचाने का था। हालांकि, हमारे जो जवान रेस्क्यू में लगे थे, सभी को वैक्सीन की दो डोज लग चुकी थीं। उन्होंने कहा, जिंदा रहेंगे तो कोरोना का सामना दोबारा करेंगे, उस वक्त हमारा यही मोटो था।
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