
नई दिल्ली [भारत], 13 जुलाई (एएनआई): चुनाव आयोग द्वारा विभिन्न राज्यों में विशेष मतदाता सूची संशोधन (Special Electoral Revision - SIR) के तरीके की तीखी आलोचना करते हुए, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी ने सोमवार को कहा कि यह कवायद अच्छी मंशा से नहीं की गई है और जिस तरह से इसने करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए हैं, वह "लोकतंत्र के साथ खिलवाड़" है।
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार चुनाव आयोग द्वारा दिया गया कोई दान नहीं है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि पूरी SIR कवायद अच्छी मंशा से नहीं की गई है। जिस तरह से इसने करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए हैं, वह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। आप भारत के नागरिक हैं। मैं भारत का नागरिक हूं। मतदान हमारा संवैधानिक अधिकार है। अनुच्छेद 326 कहता है कि हर किसी को पंजीकृत किया जाना चाहिए। तो यह चुनाव आयोग का कोई दान नहीं है जो वे आपको देंगे।"
कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग "मतदाताओं का जीवन मुश्किल बना रहा है"। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के दौरान 27 लाख मतदाता वोट नहीं डाल सके और इसका असर नतीजों पर पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि "सुप्रीम कोर्ट ने भी हमें निराश किया" क्योंकि वह नागरिकों के बचाव में आगे नहीं आया। उन्होंने कहा, "वे मतदाताओं का जीवन मुश्किल बना रहे हैं। बंगाल में 27 लाख मतदाता वोट नहीं दे सके। इसका असर नतीजों पर पड़ा। क्या यही मंशा थी? शायद ऐसा ही था। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी भारत के नागरिकों के बचाव में न आकर हमें निराश किया... बाद में बंगाल, बिहार, असम के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि अगर आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो आप कई अन्य अधिकार खो देंगे।"
विपक्षी दलों ने बिहार और बंगाल सहित कई राज्यों में SIR अभ्यास के तरीके की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इस कवायद से योग्य मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि इस संशोधन का उद्देश्य सटीक और अपडेटेड मतदाता सूची सुनिश्चित करना है। (एएनआई)
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