
Delhi Car Blast Case: दिल्ली ब्लास्ट केस में सुरक्षा एजेंसियां उन कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं, जो एक ऐसे क्रॉस-बॉर्डर टेरर प्रोजेक्ट की कहानी बयां करते हैं, जिसकी प्लानिंग सालों पहले शुरू हुई थी। इसी ब्लूप्रिंट का मुख्य चेहरा 43 साल की डॉ. शहीन शाहिद है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के अंदरूनी नेटवर्क में 'मैडम सर्जन' कहा जाता था। यह वही डॉक्टर है, जिस पर 10 नवंबर दिल्ली कार ब्लास्ट और 6 शहरों में कोऑर्डिनेटेड टेरर स्ट्राइक्स की साजिश रचने का आरोप है।
फरीदाबाद से गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों के हाथ जो डिजिटल सबूत लगे, उन्होंने पूरे मॉड्यूल की रीढ़ उजागर कर दी। इनमें हैंडरिटन डायरियां, फंडिंग की लिस्ट, रिक्रूटमेंट नोट्स, टार्गेट मैप्स और सिक्योर कम्युनिकेशन कोड्स हैं। इन दस्तावेजों में साफ 'D-6 Mission: 6 December' लिखा है, जिसे 1992 बाबरी विध्वंस के बदले के रूप में दिखाया गया था।
डॉ. शहीन शाहिद: मैडम सर्जन नाम से पहचानी जाने वाली शहीन कथित तौर पर 2021 से JeM की गहरी संरचना का हिस्सा रही। प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और फंडिंग की मुख्य जिम्मेदारी इसी पर थी।
डॉ. मुझम्मिल अहमद गनाई: कश्मीर में स्थानीय नेटवर्क को सक्रिय करने का आरोप।
उमर-उन-नबी: फंड ऑपरेशन्स और रिकॉनिसेंस (स्थान की रेकी) का काम।
जांच में खुलासा हुआ कि मॉड्यूल को 20 लाख रुपये की फंडिंग एक JeM हैंडलर के जरिए मिली। इस पैसे का इस्तेमाल रिक्रूटमेंट, सेफ हाउसेज, सिक्योर फोन, शहरों की रेकी, यात्रा और छिपने-दिखने के लिए किया गया। एजेंसियां डॉ. शहीन के 7 बैंक अकाउंट्स (3 कानपुर, 2 लखनऊ, 2 दिल्ली) की हर ट्रांज़ैक्शन को खंगाल रही हैं। इनके जरिए हाई-वैल्यू NEFT/RTGS, कैश विदड्रॉल, अज्ञात जमा और विदेशी इनफ्लो की आशंका जताई जा रही है।
डॉ. शहीन का इतिहास काफी रहस्यमयी है। 2010 के बाद से उसकी सोच में अचानक से बदलाव आया। लगातार विदेशी लोकेशन पर जाने की बात सामने आई। 2013 में अचानक छुट्टी लेकरव ह गायब हो गई। 4 जनवरी 2014 को लौटने की बात की लेकिन कभी वापस नहीं आई। 2016 में जब यूनिवर्सिटी स्टाफ उसके पते पर पहुंचा तो पता फर्ज़ी निकला। 2021 में उसे कॉलेज से फॉर्मली डिसमिस कर दिया गया। सहकर्मी उसे सॉफ्ट स्पोकन, कम बोलने वाली और अक्सर अपने छोटे बच्चे को ड्यूटी पर लाने वाली डॉक्टर बताते हैं।
पूछताछ में सामने आया कि मार्च 2022 में पूरा मॉड्यूल तुर्किये गया था, जहां उनका संपर्क ISI हैंडलर अबू उकाशा से हुआ। वहीं से 6 दिसंबर मिशन को शुरू करने का ग्रीन सिग्नल मिला। 2010 से 2025 तक की बात करें तो 2010 में डॉ. शहीन शाहिद एक विदेशी भारतीय मूल के डॉक्टर से संपर्क में आई, जिससे विचारधारा बदलने लगी। 2013 में GSVM कॉलेज से अचानक गायब होकर 2015-16 में JeM सर्कल में कथित एक्टिव इंडक्शन, 2021 में पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ सिस्टमेटिक प्लानिंग शुरू हुई। 2022 में तुर्किये में ISI मीटिंग के बाद 2025 में दिल्ली ब्लास्ट और D-6 मिशन का खुलासा हुआ। एक रिश्तेदार ने बताया कि जब उससे उसके फैसलों पर सवाल पूछा गया, उसने कहा, 'मैंने अपने लिए काफी जी लिया। अब अपनी कौम का कर्ज उतारना है।'
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